Sarso ki kheti mp : सरसों की यह किस्में देती है 4 गुना तक पैदावार, पहले साल खेती कर किसान हो जाएंगे मालामाल

Sarso ki kheti mp : सरसों की यह किस्में देती है 4 गुना तक पैदावार, पहले साल खेती कर किसान हो जाएंगे मालामाल

Sarso ki kheti mp : खरीफ फसल को किसान भाई समेटने में लगे हुए हैं। उड़द, तिल, मूंग, सोयाबीन आदि की फसलों की गहाई लगभग पूरी हो चुकी है। अब बची है धान। जिसकी गहाई कराने में किसान लगे हुए हैं। खरीफ फसलों के बाद रवी सीजन की फसलों का समय आता है। रबी सीजन में गेहूं, चना, मसूर, अलसी, सरसो, मटर, जौ अदि की खेती की जाती है। सरसों की खेती मध्यप्रदेश में एक बड़े पैमाने पर की जाती है। क्योंकि यह नकदी फसल में से एक मानी जाती है। इसके बाजार में अच्छे दाम मिलते हैं। सरसो का उपयोग घरेलू कार्य में भी खूब किया जाता है। इस प्रकार किसान सरसों से मोटी करने करने के साथ ही घरेलू उपयोग के लिए भी टेंशन फ्री हो जाते हैं।

यदि आप भी सरेसो की खेती करते हैं, और सरसो से अच्छा उत्पादन प्राप्त करना चाहते हैं। तो आज हम आपको सरसो की कुछ अच्छी उत्पादन वाली किस्मों के बारे में बताएंगे। ऐसा माना जाता है कि यह अच्छी क्वालिटी की सरसों होने के साथ ही यह उत्पादन के मामले में भी बेहद शानदार है। इसमें क्रीड़, मकोड़ा आदि का खतरा बेहद कम होता है। तो चलिए जानते हैं सरसों की बेस्ट क्वालिटी के बारे में।

पूसा सरसों -28, जाने इसकी खासियत

सरसों की यह किस्म 105 दिन से लेकर110 दिनों में पककर पूरी तरह से तैयार हो जाती है।
पूसा की इस किस्म से करीब 1750 से लेकर 1990 किलोग्राम तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
पूसा सरसों की इस किस्म को हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली एवं जम्मू कश्मीर जैसे राज्यों के लिए विकसित की गई है।
इस किस्म में तेल की मात्रा प्रतिशत 21.5 प्रतिशत पाई गई है।

सरसों की बुवाई में इन चीजों का रखें ध्यान

सरसों की बुवाई करते समय किसान भाईयों को कुछ विशेष चीजों का ध्यान रखना चाहिए। जो इस प्रकार हैं।
कृषि से जुड़े जानकारों की माने तो सरसों की बुवाई के लिए सबसे उपयुक्त समय 5 से 25 अक्टूबर के बीच का होता है। इस समय की गई बुवाई से अच्छा उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। सरसों की बुवाई किसी भी हाल में 25 अक्टूबर तक कर लेनी चाहिए।

एक एकड़ खेत में सरसों का एक किलोग्राम बीज प्रयोग करना चाहिए।
सरसों की बुवाई यदि कतार बद्ध तरीके से की जाए तो निराई-गुड़ाई में बेहद आसानी होती है।
सरसों की बुवाई देशी हल या सरिता या सीड़ ड्रिल से करनी चाहिए।
इसमें पंक्ति से पंक्ति की दूरी 30 से.मी. और पौधें से पौधे की दूरी 10-12 सेमी. रखनी चाहिए
सरसों की बुवाई करते समय इस बात का ध्यान रखे कि बीज को 2-3 से.मी. से अधिक गहरा नहीं बोना चाहिए। क्योंकि अधिक गहराई पर बीज बोने पर बीज के अंकुरण पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।
सरसों की बुआई के समय खेत में 100 किग्रा सिंगल सुपरफॉस्फेट, 35 किग्रा यूरिया और 25 किग्रा म्यूरेट ऑफ पोटाश का ही इस्तेमाल करना अच्छा रहता है।

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