Saturday, June 25, 2022

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Jackfruit Farming Business : कटहल की बागवानी किसानों को बनाएगी धनवान, विदेशों में तगड़ी डिमाण्ड, डॉलर में होगी बंपर कमाई

Jackfruit Farming Business : भारत के विभिन्न राज्यों में बहुतायत मात्रा में पैदा होने वाली कटहल की डिमांड विदेशों में भी खूब है। ऐसे में इसके दाम पर्याप्त मिल रहे हैं। अब तो किसान कटहल की बागवानी कर भरपूर पैसा कमा रहे हैं। लागत कम और आमदनी ज्यादा होने की वजह से कटहल की बागवानी किसानों के लिए एक अच्छा विकल्प बनकर आई है। कृषि विज्ञान की मदद से कटहल की कई प्रजातियां विकसित की गई हैं। जिनसे वर्ष भर में दो बार फल प्राप्त किए जाते हैं। आय की दृष्टि से कटहल किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है। एक बार लगाकर पौधा तैयार करने के बाद 25 वर्ष तक पर्याप्त फल प्राप्त होते हैं। और ज्यादा देखभाल की भी आवश्यकता नहीं होती।

होती है बंपर कमाई

कटहल के संबंध में बताया गया है रोपाई किया गया कटहल का पौधा 3 से 4 वर्ष में फल देने लगता है तो वही बीज से तैयार हुआ पौधा 7 से 8 वर्ष में फल देता है। पर्याप्त पैदावार कटहल के पौधे से 12 वर्ष बाद आती है। एक हेक्टेयर खेत में डेढ़ सौ पौधे लगाए जा सकते हैं। एक पौधे से करीबन 1000 किलोग्राम कटहल का फल प्राप्त होता है। ऐसे में किसान वर्ष भर में करीब 4 से 5 लाख रुपए की आमदनी ले सकते हैं।

Jackfruit Farming Business : कटहल की बागवानी किसानों को बनाएगी धनवान, विदेशों में तगड़ी डिमाण्ड, डॉलर में होगी बंपर कमाई

भारत के 2 राज्यों में कटहल को मिला है राज्यफल का दर्जा

आज हम कटहल की खेती (Jackfruit Farming Business) के संबंध में चर्चा करने जा रहे हैं तो कटहल के इतिहास के बारे में जानना आवश्यक है। जानकारी के अनुसार भारत देश में कटहल का फल और सब्जी के रूप में उपयोग करने की परंपरा लगभग 6000 वर्ष पहले की है। कटहल की पर्याप्त पैदावार के लिए प्रसिद्ध देश के केरल और तमिलनाडु राज्य में इसे राज्य फल का दर्जा प्राप्त है। वही श्रीलंका में कटहल को राष्ट्रीय फल घोषित किया गया है।

देश के महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल राज्य में कटहल की खेती बहुत पहले से की जा रही है। वहीं वर्तमान समय में कटहल की बागवानी के लिए उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और दक्षिण भारत के कई राज्य आगे हैं।

विदेशों में है डिमांड

विशेष गुणों के लिए प्रसिद्ध कटहल अब भारत से निकल कर विदेशों में भी ख्याति हासिल कर चुका है। विदेशों में कटहल की भारी डिमांड है। श्रीलंका में कटहल की भरपूर पैदावार हो रही है। वही अन्य देशों में भी कटहल की मांग बनी हुई है।

मिलते हैं पर्याप्त पोषक तत्व

कटहल में अगर पोषक तत्वों की बात की जाए तो यह स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभप्रद है। कटहल को फल और सब्जी दोनों की मान्यता प्राप्त है। कटहल कच्चा रहता है उसकी सब्जी बनाई जाती है। वही पक जाने पर यह फल का काम करता है। कटहल में आयरन, कैल्शियम, विटामिन ए, विटामिन सी और पोटैशियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है। जो आमतौर पर अन्य फल और सब्जियों में नहीं मिलता।

यह भूमि है उपयुक्त

कटहल की खेती (Jackfruit Farming Business) के लिए दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी गई है। जिस भूमि पर जलभराव ना होता हो वहां कटहल की खेती की जा सकती है। इसके लिए 7 पी एच मान भूमि सबसे उपयुक्त बताई गई है। अधिक ठंडी को छोड़ दिया जाए तो बरसात और गर्मी में कटहल का पौधा पर्याप्त विकसित होता है।

कटहल की खेती (Jackfruit Farming Business) के संबंध में बताया गया है कि इसके पौधे धनी चौड़ी पत्ती वाले, वर्षभर हरा रहने वाला पौधा है। सूर्य की किरणें सीधे जमीन पर पेड़ के नीचे नहीं पड़ती। ऐसे में कटहल के वृक्ष के नीचे काफी, इलायची, काली मिर्च, हल्दी तथा अदरक की खेती की जा सकती है और अतिरिक्त आय अर्जित किया जा सकता है।

कटहल का पौधा रोपण करते समय भूमि की गहरी जुताई करनी चाहिए। इसके बाद जिस जगह पर हाल के पौधे का रोपण करना है वहां पर 1 मीटर व्यास का गहरा गड्ढा खोदे। गड्ढे में 25 किलोग्राम गोबर, ढाई सौ ग्राम सुपर फास्फेट 500 ग्राम फोटोस और 1 किलो नीम की खली डालकर मिलाएं। इसके बाद कटहल के पौधे का रोपण करें।

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