देवतालाब शिव मंदिर दर्शन के लिए ड्रेस कोड लागू, पुरूषों के लिए धोती-कुर्ता, महिलाएं साड़ी में कर सकेंगे दर्शन

देवतालाब शिव मंदिर दर्शन के लिए ड्रेस कोड लागू, पुरूषों के लिए धोती-कुर्ता, महिलाएं साड़ी में कर सकेंगे दर्शन

रीवा जिला स्थित देवतालाब शिव मंदिर काफी प्रसिद्ध है। जहां दुनियाभर के भक्त भगवान शिव के दर्शन के लिए आए दिन पहुंचते हैं। भगवान भोलेनाथ के विशेष दिनों में यहां भक्तों की भारी भीड़ लगती हैं। लेकिन भोलेनाथ की नगरी देवतालाब में अब ड्रेस कोड लागू हो गया है। इस ड्रेस कोड के लागू हो जाने से पुरूष व महिलाएं निर्धारित ड्रेस कोड में ही भगवान शिव का दर्शन लाभ ले पाएंगी।

खबरों की माने तो भोलेनाथ की नगरी देवतालाब में अब दर्शन के लिए ड्रेस कोड लागू कर दिया गया है। जिससे मंदिर में जींस स्कर्ट या आधुनिक परिधान पहनकर श्रद्धालु भोलेनाथ के दर्शन के लिए मंदिर के अंदर नहीं जा सकेंगे। भगवान शिव के दर्शन के लिए पुरुषों को धोती कुर्ता एवं महिलाओं को साड़ी पहनकर ही जाने पर प्रवेश मिलेगा।

रविवार को शिव मंदिर प्रबंध समिति की बैठक में ये बड़ा फैसला लिया गया है। मंदिर प्रबंध समिति के सदस्य एवं मध्य प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम की उपस्थिति में यह निर्णय लिया गया है। विधानसभा अध्यक्ष ने ड्रेस कोड लागू करने के पीछे इस निर्णय को भगवान की आस्था का विषय बताया।

देवतालाब शिव मंदिर दर्शन के लिए ड्रेस कोड लागू, पुरूषों के लिए धोती-कुर्ता, महिलाएं साड़ी में कर सकेंगे दर्शन

ये हैं देवतालाब शिव मंदिर का इंतिहास

देवतालाब मंदिर के प्राचीन इतिहास को लेकर कहा जाता कि शिव के परम भक्त महर्षि मार्कण्डेय देवतालाब स्थित शिव के दर्शन के हठ में आराधना में लीन थे। महर्षि को दर्शन देने के लिए भगवान यहां पर मंदिर बनाने के लिए विश्वकर्मा भगवान को आदेशित किया। उसके बाद रातों रात यहां विशाल मंदिर का निर्माण हुआ और शिव लिग की स्थापना हुई। कहते है कि एक ही पत्थर पर बना हुआ अदभुत मंदिर सिर्फ देवतालाब में स्थित है।

ये भी है मान्यता

देवतालाब शिव मंदिर को लेकर दूसरी मान्यता यह भी है कि इस मंदिर के नीचे शिव का एक दूसरा मंदिर भी है। जिसमें चमत्कारिक मणि मौजूद है। कई वर्षों पहले मंदिर के तहखाने से लगातार सांप बिच्छुओं के निकलने की वजह से मंदिर का दरवाजा बंद कर दिया गया है। मंदिर के ठीक सामने एक गढी मौजूद थी। किवदंती है कि इस मंदिर को गिराने की जैसे ही राजा ने योजना बनाई उसी वक्त पूरा राजवंश जमीन में दबकर नष्ट हो गया। इस शिवलिंग के अलावा रीवा रियासत के महाराजा ने यही पर चार अन्य मंदिरों का निर्माण कराया है। ऐसा माना जाता कि देवतालाब के दर्शन से चारोधाम की यात्रा पूरी होती है। इस मंदिर से भक्तों की आस्था जुड़ी हुई। इसीलिए यहां प्रति वर्ष तीन मेले लगते है और इसी आस्था से प्रति माह हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते है।

ऐसे हुआ ड्रेस कोड लागू

मंदिर प्रबंध समिति की बैठक ग्राम पंचायत देवतालाब में आयोजित की गई। जिसकी अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने की। समिति ने सर्वसम्मति से मंदिर में प्रवेश करने के लिए ड्रेस कोड निर्धारित करने का प्रस्ताव पारित किया। प्रस्ताव के अनुसार मंदिर के बाहर से हर व्यक्ति को भोलेनाथ के दर्शन मिलेंगे लेकिन मंदिर के अंदर प्रवेश करने के लिए पुरुषों को परदनी तथा महिलाओं को साड़ी पहनना आवश्यक होगा।

भगवान के दर्शन के लिए परिसर में एलईडी स्क्रीन लगाई जाएगी। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि देवतालाब के शिव मंदिर परिसर का पूरी तरह से विकास किया जाएगा। शिवरात्रि में यहां तीन दिवसीय शिव विवाह उत्सव का आयोजन होगा। भगवान भोलेनाथ की बारात निकालने के साथ अन्य कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

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