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पितृ पक्ष में कौए को क्यो दिया जाता है आहार, क्या है इसके पीछे महत्व जानिए

Pitru Paksha 2021 : साल 2021 के पितृ पक्ष की शुरूआत हो चुकी हैं। जिसकी समाप्ति 6 अक्टूबर को होगी। पितृ पक्ष पूरी तरह से मृत आत्माओं के लिए समर्पित पखवाड़ा है। इन दिनों में लोग पूर्वजों को याद करते हैं। पूजा-पाठ करते हैं। श्राद्ध करते हैं। 

पितृ पक्ष में कौए को क्यो दिया जाता है आहार, क्या है इसके पीछे महत्व जानिए

मृत आत्माओं की शांति के लिए अनुष्ठान आदि करते हैं। ब्राम्हणो को भोजन कराते हैं। उन्हें दान-दक्षिणा आदि देते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से पूर्वजों को सुख-शांति मिलती और वह प्रसन्न होकर अपनी संतानों को सुख-समृद्धि का आर्शिवाद देते हैं।

कौओं का महत्व

कौओ को वैसे तो कई कामों में अशुभ का कारक माना गया है। लेकिन पितृ पक्ष में इन्हें कुछ विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि पितृ पक्ष के दरम्यान अगर कौआ खाना खा ले तो वह सीधे पूर्वजों तक पहुंचता है। कौओ को यमराज का कारक माना गया है। कहा जाता है कि कौआ के भोजन करने से यमराज प्रसन्न होते हैं और वह सीधे पूर्वजों को भी पुण्य लाभ प्रदान करते हैं।

यमराज का संदेश वाहक कौआ

ज्योतिषविद् बताते हैं कि कौआ यमराज का संदेश वाहक हैं। इसलिए पितृ पक्ष के दौरान कौए को भोजन कराने से यम प्रसन्न होते हैं और वह संबंधित पूर्वजों को सीधे पुण्य लाभ पहुंचाते हैं। लेकिन अब कौए बहुत कम मात्रा में दिखाई देते हैं। ऐसे में अगर श्राद्ध के दौरान कौए भोजन खिलाने के लिए न मिले तो आचार्य गणेशानंद बताते है कि किसी भी पक्षी को भोजन कराया जा सकता हैं। 

वह कहते है कि श्राद्ध के दौरान गाय, कुत्ते एवं कौओ को एक थाली अलग से निकाली जाती है। लेकिन कौओं को भोजन कराना आति उत्तम फल प्रदान करता हैं। प्राचीन शास्त्रों की माने तो यम ने कौओं के वरदान दिया था कि अगर तुम्हे कोई खाना खिलाएंगा तो वह सीधे पूर्वजों की आत्मा को शांति पहुंचाएगा। श्राद्ध के दौरान जितना लाभकारी ब्राम्हणो को भोजन कराना है उतना ही कौओ को भी कराना है। मान्यता है कि कौए पितरों के रूप में हमारे आसपास मौजूद होते है और वह अपना अंश लेने आते हैं। 

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