Breaking News

आश्चर्य किन्तु सत्य ! मोबाइल फोन से झाड़ देते हैं काले नाग का भी जहर

 Surprise but true! Black snake is also poisoned by mobile phone : रीवा। अभी तक आप सबने यह सुना होगा कि सांपों द्वारा सामान्य आदमी को काटने का इलाज झाड़-फूक द्वारा कर किया जाता है। इस मामले में सपेरे काफी चर्चित हैं। जो सांप पालते भी हैं और सांपों द्वारा काट लिए जाने पर उसका इलाज खुद ही झाड़-फूक से करते हुए जहर उतार लेते हैं। लेकिन वर्तमान हाईटेक युग में एक नाग संत ऐसे भी हैं जो  मोबाइल फोन से मंत्र पढ़कर मरीज के शरीर से खतरनाक से खतरनाक सर्प का जहर उतार देते हैं और मरीज पूर्ववत स्वस्थ और चंगा हो जाता है। यह एक आश्चर्यजनक कारनामा है। वहीं सौ फीसदी सत्य भी है।
आश्चर्य किन्तु सत्य ! मोबाइल फोन से झाड़ देते हैं काले नाग का भी जहर

हम बात कर रहे हैं खरगौन जिला अंतर्गत सनावत में रहने वाले नाग संत विजय निकम की। यह एक चर्चित नाम है। साथ ही वे ऐसा कैसे कर लेते हैं यह एक शोध का भी विषय है। जब उनसे चर्चा की तो उन्होंने बताया कि यह क्रम उनका 44 सालों से लगातार जारी है। 

अब तक अनगिनत लोगों को श्री निकम के प्रयासों से नई जिंदगी मिल चुकी है। चर्चा के दौरान उन्होंने जब पूरा वृतांत अपने बारे में बताया तो यह लगा कि वाकई में श्री निकम नाग संत हैं और नाग देवता का उन्हें पर्याप्त आर्शिवाद भी प्राप्त है। चर्चा के दौरान उन्होंने बताया कि उनकी उम्र फिलहाल 75 वर्ष को पार कर रही है। वे सनावद जिला खरगोन में अंजन टेकणी ईलट देव नागोवाधाम मंदिर में पिछले कई दशकों से ही रह रहे हैं। यहां पर पिछले 41 सालों से अखण्ड ज्योति जल रही है। 

नाग देवता का यह मंदिर वर्ष 1975 में स्थापित हुआ था। तब यहां पूरा जंगली इलाका जैसे था। अब तो यहां पर 24 घंटे लोगों की भीड़ लगी रहती है और अब सामान्य इलाका हो गया है। मंदिर परिसर भी बड़ा हो गया और काफी संख्या में श्रद्धालु आते-जाते हैं। 

75 वर्षीय विजय निकम से नाग संत बनने की कहानी के बारे में वे बताते हैं कि यहां पर स्थित पॉलिटेक्निक कालेज में सिविल तृतीय वर्ष का छात्र बलिराम पाटीदार पढ़ते थे और हॉस्टल में रहते थे। नाग दम्पत्ति का एक बच्चा हॉस्टल में पहुंचा और बलिराम पाटीदार ने उसे मार दिया। इतना ही नहीं, उस छोटे सांप के बच्चे को कई छात्रों ने मिलकर कागज में लपेटकर जला दिया और झाड़ी में फेंक दिया। 

इस घटना के तीसरे दिन बलिराम पाटीदार के शरीर में नाग देवता अदृश्य रूप में प्रवेश कर गए थे। इसके बाद हुआ यह कि अच्छा-खासा पढऩे वाला लड़का अजीब हरकते करने लगा। प्राचार्य के सामने सिर पटकने लगा। कक्षा के भीतर भी सर्प जैसी हरकतें करने लगा और सर्प की ही तरह फुचकारे निकालने लगा, सर्प की ही तरह अगड़ाईयां लेने लगा। श्री निकम ने बताया कि मैं पहले भी झाड़-फूक करता था। इस बीच जब मैं बलिराम पाटीदार को उसकी गंभीरावस्था के दौरान पूछताछ शुरू की तो, उसके शरीर में अदृश्य नागराज ने बताया कि यहां के लड़कों ने एक बड़ी खिलवाड़ करी है और उसकी सजा मैं दूंगा। 

मैं इन लड़कों को दंश करूंगा। उस अदृश्य नाग देव ने जब मुझसे यह सब कहा तो मुझे भी यह भान हुआ कि किसी के बेटे के साथ इस तरह की घटनाकारित होगी तो उसके परिजन गुस्से में रहेंगे ही। इसी दौरान नाग देव ने यह भी बताया कि मेरे बच्चे को इन लड़कों ने कागज में लपेटकर जलाया और अभी भी वह पीछे की झाड़ी में अधजली अवस्था में पड़ा हुआ है। 

मैं तत्काल ही उस स्थल पर गया और देखा तो वाकई में सर्प का बच्चा अधजली अवस्था में पड़ा हुआ था। जिसकी लम्बाई लगभग ढाई से तीन फिट की थी। बाद में मैंने स्वयं विधिवत उक्त नाग देव बालक का अंतिम संस्कार किया। इसके बाद भी 6 माह तक बलिराम पाटीदार के शरीर में नाग देव प्रविष्ट हो जाते थे। मैंने कई बार माफी मांगी और यह तक कहा कि बालकों से गलती हो गई है, इन्हें क्षमा किया जाए। तब जाकर नाग देव शांत हुए। 
इसी दौरान जब उन्होंने मुझसे अदृश्य भाव में ही कहा कि चैत्र नवरात्रि में चॉदी के नागों की स्थापना होनी चाहिए और यह निर्माण पूरा नहीं होना चाहिए। केवल उसमें प्राण प्रतिष्ठा भर हो। जब मैंने यह करना शुरू किया तो किसी को विश्वास नहीं होता था। तब के कलेक्टर आदि भी पूरे घटनाक्रम की जानकारी लिए थे। छात्रावास में रहने वाले छात्र भी हैरान होते रहते थे। 

आज यह स्थल नागोवाधाम मंदिर सनावद के नाम से प्रसिद्धि प्राप्त कर चुका है। काफी लोग आते हैं और उनका यहां पर भी उपचार होता है। साथ ही दूर-दराज से सर्प दंश से पीडि़त लोगों का उपचार फोन पर ही उपलब्ध हो जाता है। इस बीच जब यह पूछा गया कि ऐसा कैसे संभव है। तो उन्होंने बताया कि आपके जिले के ही मऊगंज के रहने वाले एक व्यक्ति का उपचार हाल फिलहाल फोन से किया गया है जो व्यक्ति अब पूर्णत: स्वस्थ्य है। 

बलिराम पाटीदार अभी भी स्वस्थ्य

सनावद पॉलिटेक्निक से डिप्लोमा करके निकले बलिराम पाटीदार एरीगेशन विभाग में पहले सब इंजीनियर थे और अभी हाल में ही कुछ दिनों पहले बतौर एसई के पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। श्री निकम बताते हैं कि श्री पाटीदार नगोवा धाम के भक्तों में से एक हैं। क्योंकि उन्हें इसी धाम से ही नया जीवन प्राप्त हुआ था। 

मेरा जीवन अब इसी परिसर के लिए समर्पित

नागोवाधाम परिसर में ही रहने वाले संत विजय निकम कहते हैं कि मैं ही अब इसी परिसर का एक सदस्य हो गया हूं। यहां पर लोग आसानी से मुझसे मिल भी लेते हैं और जन सेवा ही अब मेरा लक्ष्य हो चुका है। उन्हें खुद याद नहीं है कि उन्होंने अब तक कितने लोगों की जीवन रक्षा की है। लेकिन वे कहते हैं कि अगर मेरी वजह से किसी की जीवन रक्षा होती है तो यह बहुत बड़ी उपलब्धि है और मैं अपने नाग देव से कहता हूं कि अगर सर्पदंश से पीडि़त कोई व्यक्ति मेरे पास आ जाए तो उसके जीवन की रक्षा होनी चाहिए। यह आर्शिवाद मुझे लगभग मिल जाता है। इस बीच उन्होंने आम जन के लिए अपना मोबाइल नम्बर भी उपलब्ध करा रखा है। जो 9406609189 है। 

No comments