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सदस्यता अभियान में नहीं कांग्रेसियों की रूचि

 Congressmen not interested in membership campaign : रीवा। एक ओर जहां रीवा जिले में भारतीय जनता पार्टी के लोग संगठन के सदस्यों को बढ़ाने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं और ज्यादा से ज्यादा लोगों को भाजपा से जोडऩे के लिए प्रयासरत हैं वहीं दूसरी ओर कांग्रेस अपनी घोषणाओं के बाद भी संगठन सदस्यता के बारे में लगभग निष्क्रिय सी बनी हुई है। कुछ दिनों पहले संगठन के दो-तीन पदाधिकारियों ने अभियान चलाने के लिए पहल की थी।
सदस्यता अभियान में नहीं कांग्रेसियों की रूचि


 लेकिन वह भी शायद ठण्डे हो गए। इसके अलावा सबसे बड़ी खास बात यह है कि ग्रामीण स्तर तक कांग्रेस नेताओं व कार्यकर्ताओं के पास सदस्यता कॉपी भी नहीं पहुंची है। ऐसे में सदस्य कैसे बन पाएंगे। यह अपने आप में प्रश्र चिन्ह है। 
उल्लेखनीय है कि वर्तमान में कांग्रेस द्वारा सदस्यता अभियान शुरू किए जाने का सिलसिला चलाया गया है। हालांकि इसके लिए स्थानीय स्तर पर कोई तिथि निर्धारित नहीं की गई है। लेकिन यह कहा गया है कि दो महीने के भीतर ज्यादा से ज्यादा कांग्रेस के सदस्य बनाए जाने हैं। 

रीवा में इसके लिए बकायदें एक कार्यक्रम भी आयोजित हुआ और उसमें यह संकल्प लिया गया था कि हर नेता और कार्यकर्ता ज्यादा से ज्यादा सदस्य बनाएंगे। साथ ही इस दौरान प्रदेश की कमलनाथ सरकार की उपलब्धियों के बारे में आम जन को अवगत कराएंगे। 

लेकिन वर्तमान में जो स्थितियां दिखाई दे रही हैं उसमें कहीं भी यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि कांग्रेस का सदस्यता अभियान कहीं चालू भी है या नहीं। हालांकि बीते दिनों एनएसयूआई की सदस्यता अभियान के बारे में जानकारी कांग्रेस संगठन द्वारा दी गई थी। लेकिन मुख्य रूप से कांग्रेस की सदस्यता अभियान के बारे में कहीं कोई जिक्र नहीं हो रहा है। 

इस मामले में खास बात यह है कि कांग्रेस के स्थानीय संगठन पदाधिकारियों ने कस्बाई और ग्रामीण इलाकों में सदस्यता कॉपी ही नहीं भेजी है। जिसकी वजह से अब कांग्रेस का सदस्य कैसे बन पाएंगे यह अपने आप में एक प्रश्र चिन्ह खड़ा करता है। 

वहीं सूत्र बताते हैं कि रीवा जिले में दो सदस्यता कापी आई है। वह अपने आप में ही गड़बड़ है। उस सदस्यता कॉपी में वर्ष 2010 लिखा हुआ है। कुछ दिनों तक इसी सदस्यता कापी में कई सदस्य बना लिए गए। लेकिन बाद में इस सदस्यता कापी से सदस्य बनाने का काम फिलहाल रोक दिया गया है। 

अब जब नई सदस्यता कॉपी आएगी तब सदस्यता अभियान को लेकर सक्रिय होने की बात कही जा रही है। वहीं दबी जुबान यह कहा जा रहा है कि ताजी सदस्यता कॉपी ऊपर भी मौजूद नहीं थी। इसकी वजह से यह स्थिति बनी है। 

ग्रामीण क्षेत्र का कार्यकर्ता लगभग निराश

कांग्रेस संगठन के पदाधिकारियों एवं बड़े नेताओं की गतिवधियों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों का कार्यकर्ता खासा निराश सा है। इन कार्यकर्ताओं का कहना है कि नेता आते हैं, कुछ लोगों से मिलकर चले जाते हैं। जो जमीनी हैं और गांवों में काम करते हैं, उन्हें कोई तवज्जों ही नहीं देता। 

दूरस्थ ग्रामीण अंचलों की हालत और बुरी है। जहां कभी केवल लोग कांग्रेस-कांग्रेस रटते थे, वहां अब मोदी-मोदी की बात हर जुंबा पर होती है। इस मुद्दे पर कांग्रेस के लीडर जरा भी गंभीर नहीं है। जिसकी वजह से ग्रामीण इलाके का कार्यकर्ता नेताओं तक से नहीं जुड़ पाता। दूसरी ओर एक अहम मुद्दा यह भी है कि कांग्रेस के कार्यक्रम ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में न के बराबर होते हैं। जिससे आम जन की दूरी कांग्रेस से लगातार बढ़ती जा रही है।

जिन्होंने लिया संकल्प, उन्हेंं  भी तरजीह नहीं

यहां एक खास बात यह भी सामने आई है कि रीवा जिले के कुछ विधानसभा क्षेत्रों में लोगों ने कांग्रेस के लिए संकल्पित भाव से सदस्य बनाए जाने का संकल्प लिया है। उन्होंने अपने अभियान की शुरूआत भी कर दी। उदाहरण के लिए गुढ़ विधानसभा क्षेत्र में सबसे पहले सदस्यता अभियान की शुरूआत ग्रामीण इलाकों में हुई है। लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि ऐसे लोगों को भी संगठन तरजीह देना तो दूर की बात है, उन्हें स्थानीय स्तर पर तवज्जों देने में प्रॉब्लम होती है। इन हालातों में कांग्रेस की सक्रियता कैसे बढ़ पाएगी यह एक सवाल उठ खड़ा हो रहा है।

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