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केन्द्रीय जेल रीवा का प्रमुख सचिव जेल ने किया निरीक्षण, दिया व्यवस्था सुधारने का निर्देश

रीवा। केंद्रीय जेल रीवा की व्यवस्था बद से बदतर हो जा रही है। न ही बंदियों के रहने के लिए पर्याप्त बैरक हैं और न ही पानी की समुचित व्यवस्था। ऐसा कोई साल नहीं गुजरता जिस वर्ष मंत्री, सचिव या फिर जेल डीजीपी निरीक्षण के लिए रीवा केंद्रीय जेल न आयें। आते हैं समस्या सुनते हैं और प्रस्ताव बनवा कर भेजने की बात कर उल्टे पांव लौट जाते हैं। बीते चार वर्षो में जेल प्रशासन रीवा ने पीडब्लूडी से दर्जनों प्रस्ताव बनवा कर शासन को भेजा। प्रस्ताव कहां गया उस पर क्या प्रतिक्रिया हुई इस बात का जबाव न ही जेल प्रशासन रीवा के पास है और न ही दौरे में आये मंत्री, सचिव और डीजीपी जेल के पास। बस बजट न होने की बात सामने आती है। मंगलवार को मुख्य सचिव गृह एंव जेल विभाग एसएन मिश्रा का रीवा आगमन हुआ। 
केन्द्रीय जेल रीवा का प्रमुख सचिव जेल ने किया निरीक्षण, दिया व्यवस्था सुधारने का निर्देश

अन्य कार्यो को निपटाते हुए बुधवार के दिन केंद्रीय जेल रीवा का आकस्मिक निरीक्षण करने पहुंच गये। जेल के हर वार्ड, कारखाना, रसोईया का निरीक्षण किया। मुख्य सचिव श्री मिश्रा बैरकों में प्लास्टिक के 15 लीटर के डिब्बे देख कर भड़क उठे। जेल प्रशासन द्वारा बताया गया कि इन डिब्बों में बंदी अपने पीने-नहाने के लिए पानी स्टोर करके रखते हैं। साथ ही बताया कि बंदियो के रहने के लिए 16 बैरकों के निर्माण का प्रस्ताव कई बार भेजा गया, जिसमें आज तक स्वीकृत नहीं मिली। साथ ही पानी की समस्या एंव सभागार और वर्कशेड न होने की बात प्रमुख सचिव के सामने रखी गई। प्रमुख सचिव जेल प्रशासन द्वारा अवगत कराये गए समस्याओं के लिए पीडब्लूडी से प्रस्वाव बना कर भिजवाने की वहीं बातें की जो इनके पूर्व भी निरीक्षण में आने वाले जिम्मेदारों ने की थी। प्रमुख सचिव जेल एंव गृह विभाग ने कहा कि बंदियो के पीने के लिए प्रत्येक बैरक में टंकी लगवायें इसके साथ ही बैरक के बाहर नहाने के लिए बड़ी टंकी लगवाने के लिए ही उसमे सावर और टोटी लगवायेें। यहां सवाल यह उठता है कि बैरकों के निर्माण के लिए वर्षो से  प्रस्ताव पर प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं। जिनका निर्माण तो नहीं हुआ अब सामने टंकी की समस्या आ गई। इसके लिए शासन को कितने साल तक प्रस्ताव बना कर भेजना पड़ेगा? भोपाल जेल बे्रक के बाद शासन के आदेश पर प्रदेश के सभी जेलों की सुरक्षा को लेकर निरीक्षण किया गया था। 
 उसी दरम्यान जेल एडीजीपी गाजीराम मीणा रीवा आये। रात जेल के गेट में पहुंचते ही अपनी रिवाल्वर से हवाई फायर कर जेल प्रशासन को अपने आने की सूचना दी अपनी टीआरपी बढ़ाने कुछ मीडियाकर्मी को बुला लिया था। जेल का भ्रमण किया और सुरक्षा के बड़े-बड़े टिप्स तत्कालीन जेल अधीक्षक सोलंकी को दिया  साथ ही बैरक बढ़ाये जाने सहित अन्य समस्याओं के निदान के लिए प्रस्ताव बना कर भेजने का निर्देश देकर चले गये। उसके बाद एडीजीपी श्री मीणा ने केंद्रीय जेल रीवा की सुध नहीं ली कि बैरक बने, सुरक्षा के लिए दीवालों की ऊचांई बढ़ी कि नहीं। 

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