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प्रभारी मंत्री की समझाइश का पड़ा असर, जिला पंचायत में हुआ सबकुछ ठीक-ठाक,

रीवा। लगभग 20-22 दिन बाद अब जिला पंचायत सामान्य रूप से कामकाज की स्थिति में दिखाई देने लगा है। इस बीच में ऐसा प्रतीत हो रहा था कि सीईओ और अध्यक्ष के बीच उपजे विवादों के चलते स्थितियां गचर-पचर हो जाएगी। लेकिन प्रभारी मंत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मामले का पटाक्षेप करा दिया। हालांकि जिला पंचायत अध्यक्ष का गुस्सा अभी भी कम नहीं हुआ है। लेकिन मौके की नजाकत को देखते हुए फिलहाल उन्होंने भी शांति रूप से काम करने का निर्णय ले लिया है। अलबत्ता दफ्तर में फाइलों का आदान-प्रदान शुरू होने से कर्मचारियों ने भी राहत की सांस ली है। 

सूत्र बताते हैं कि जुलाई माह के अंतिम  सप्ताह में सामान्य प्रशासन की बैठक के दौरान उपजे विवाद की परिणिति यह हुई थी कि जिला पंचायत अध्यक्ष अभय मिश्र और सीईओ जिला पंचायत अर्पित वर्मा एक-दूसरे को देखना तक पसंद नहीं कर रहे थे। 

सामान्य तौर पर अभय मिश्र को अक्खड़  नेता के रूप में माना जाता है, साथ ही श्री मिश्र के बारे में यह कहा जाता है कि वे कई बार जन सामान्य के काम नियम के शिथिलीकरण के तहत भी करवाना चाहते हैं। उसके पीछे का कारण भले ही व्यक्तिगत स्वार्थ न हो, लेकिन अधिकारी नियमों का हवाला देकर मामलों को टालना उन्हें गवारा नहीं। सामान्य प्रशासन समिति की बैठक के दौरान हुआ भी यही था। एक मामले को लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष अतिरिक्त बजट दिलवाना चाह रहे थे, जबकि उस फाइल को ही सीईओ अर्पित वर्मा ने सीधे तौर पर निरस्त कर दिया था। जिसका पता लगते ही अभय मिश्रा मन ही मन बमक गए थे। उधर तनातनी का माहौल लगभग 15 दिन तक चलता रहा। साथ ही सीईओ और जिला पंचायत अध्यक्ष के बीच देखा-दृष्टि तक बंद हो गई थी। उधर 9 अगस्त को जिला योजना समिति की बैठक के दौरान अभय मिश्र का अचानक उठकर चले जाना और साथ में सदस्यों को ले जाने की बात प्रभारी मंत्री को खुद भी समझ में नहीं आई थी। जिसको लेकर प्रभारी मंत्री खासा परेशान थे कि आखिर रीवा में यह हो क्या रहा है। उन्होंने पूरी जानकारी मंगाई तब उन्हें कारणों का पता लगा। 
इसके बाद प्रभारी मंत्री लखन घनघोरिया ने इस मुद्दे को लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष से बात की तथा उन्हें समझाते हुए कहा कि वे सीनियर लीडर हैं। छोटी-छोटी बातों को एक मुद्दा बना लेना अच्छी बात नहीं होती है। साथ ही यह भी कहा कि राजनीति में जितना झुककर चलेंगे उतना आगे रहेंगे। 

वहीं दूसरी ओर प्रभारी मंत्री ने सीईओ जिला पंचायत को भी इस बात की समझाइश दी कि आपस में सामंजस्य के बाद ही विकास की स्थितियां बनती हैं। नेता कई बार कुछ चीजें नहीं समझ पाते, उन्हें अधिकारी बेहतर तरीके से डील कर लेते हैं। दोनों को समझाइश देने के बाद प्रभारी मंत्री ने एक होकर काम करने की बात की। साथ ही इस बीच हमारे सूत्र बताते हैं कि जबलपुर से लगातार अध्यक्ष और सीईओ के बीच कॉन्फ्रेंसिंग कराकर मामले का पटाक्षेप करा दिया है। वहीं अब पिछले दो दिनों से फाइलों का आदान-प्रदान शुरू हो गया। साथ ही अब कर्मचारी भी राहत महसूस करने लगे हैं। 

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