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आखिर नहीं हो पाए 6 लाख मिस्ड कॉल

रीवा।  भारतीय जनता पार्टी के सदस्यता अभियान का आज आखिरी दिन था। नेताओं के प्रयास भी होते रहे, लेकिन अचानक दो दिन से लगातार हो रही बरसात और त्यौहार के चक्कर में काफी कुछ परेशानियां हुईं, और इसका परिणाम यह हुआ कि भारतीय जनता पार्टी की जिला इकाई फिलहाल अपने लक्ष्य से पीछे है। कहा जा रहा है कि दो-तीन दिन के भीतर बैक डेट में सबकुछ पूरा करने का प्रयास किया जाएगा। लेकिन ऐसा संभव नहीं दिख रहा है। 

उल्लेखनीय है कि रीवा जिले की आठों विधानसभा से 6 लाख भारतीय जनता पार्टी के सदस्य बनाए जाने थे। जिसमें दो लाख नए सदस्य बनने थे। मतलब कि  प्रति विधानसभा 25 हजार नए सदस्यों की इंट्री होनी थी। लेकिन हुआ यह कि 6 जुलाई से शुरू हुए इस अभियान की तारीख 11 अगस्त को समापन के लिए मुकर्रर की गई थी। लेकिन लगभग 50 फीसदी सदस्यता अभियान ही हो पाया था। बाद में भारतीय जनता पार्टी संगठन ने यह दलील दी कि हमारे सांसद और विधायक केन्द्र और राज्य की विधानसभा के हाऊस में व्यस्त थे। इसलिए 9 दिन का समय और बढ़ाया जाए ताकि लक्ष्य पूरा किया जा सके। प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह भी इस दलील से सहमत हुए, क्योंकि ऐसी स्थिति प्रदेश के अन्य जिलों में भी निर्मित हो रही थी। इन 9 दिनों में सांसद और विधायकों ने सदस्यता अभियान को कितनी गंभीरता से लिया, यह बात तो अलग थी, लेकिन सदस्यता अभियान को गति नहीं मिली, यह भी सत्य था। 

सूत्र बताते हैं कि स्थानीय विधायक इस मामले में ज्यादा रूचि नहीं ले रहे हैं। मसलन मनगवां विधायक पंचूलाल प्रजापति शुरूआत के चार-छह दिन बाद ही निष्क्रिय से हैं। मण्डल अध्यक्षों से भी ज्यादा जानकारियां नहीं ले पा रहे। यही स्थिति सिरमौर और सेमरिया की बनी हुई है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि सिरमौर विधानसभा सदस्यता प्रभारी महाबली गौतम का खुद का गृह क्षेत्र है। लेकिन वहां भी उन्हें पर्याप्त सपोर्ट न मिलने की जानकारियां मिल रही हैं। कई मण्डल अध्यक्ष सदस्यता प्रभारी से सीधे बात करने को भी तैयार नहीं होते। इसके पीछे का कारण पार्टी की आपसी गुटबाजी है। उधर मऊगंज विधानसभा को जहां सबसे ज्यादा कमजोर होने की खुसुर-फुसुर होती थी, वहां पर सदस्यता अभियान बेहतर बताया गया है। 

9 दिन का मिला था अतिरिक्त समय

गौरतलब है कि प्रदेश भाजपा संगठन के निर्देश पर 11 अगस्त के बाद 9 दिवस के लिए तिथि बढ़ाई गई थी जिसमें यह कहा गया था कि लक्ष्य पूरा करिए। लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि फिलहाल संगठन और सदस्यता अभियान से जुड़े लोग इस लक्ष्य को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। अगर ऐसा नहीं हो पाता तो निश्चित तौर पर रीवा जिला भाजपा इकाई की किरकिरी होना तय है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि बीते सत्र में लक्ष्य से 20 फीसदी ज्यादा सदस्यता अभियान हुआ था। यह बात अलहदा रही कि 68 हजार सदस्यों का मिलान नहीं हो पा रहा था। भाजपा संगठन के लोगों ने भी इस बात को स्वीकारा था।

 हालांकि इसके पीछे कारण यह बताया जा रहा था कि लोगों ने अपने मोबाइल नम्बर ही बदल दिए हैं। इस बार सदस्यता अभियान को हाईटेक करते हुए फार्म भरने के साथ मिस्ड कॉल करना था जो साफ्टवेयर में सीधे फीड हो रहा है। लिहाजा संगठन के लोगों की परेशानियां बढ़ती दिखाई दे रही हैं। हालांकि जिस हिसाब से संगठन के लोग बात कर रहे हैं ऐसा माना जा रहा है कि आगामी दो-तीन दिनों में लक्ष्य के करीब तक पहुंचने का पूरा प्रयास करेंगे। 

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