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विंध्य के दो और भाजपा विधायक कांग्रेस के सम्पर्क में

 रीवा। भाजपा के लिये एक और चौकाने वाली खबर। मैहर और व्यौहारी के दो विधायकों के कांग्रेस में जाने के बाद दो और भाजपा विधायक उसी लाइन पर चल रहे हैं। मुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ से मुलाकात के बाद ऐसा माना जा रहा है कि आगामी दिनों में ये दोनों विधायक कांग्रेस के पाले में जा सकते हैं। उनकी नाराजगी संगठन और स्थानीय सांसदों की मनमानी से और बढ़ गई है। उधर भाजपा संगठन को खबर लगते ही इस मामले को गंभीरता से लिया गया है साथ ही संबंधित दोनों विधायकों से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने पूंछ-परख बढ़ा दी है। 

यहां यह बता दें कि विंध्य के इन दो विधायकों में एक रीवा जिले से हैं तो दूसरे सीधी जिले के हैं। सूत्र बताते हैं कि दो दिन पूर्व भोपाल में इन दोनों विधायकों ने अलग-अलग समय में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ से सीधी मुलाकात की और इस दौरान मुख्यमंत्री ने उन्हें पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है। इस बीच पार्टी के संबंध में काफी देर तक बातें हुई हैं। सूत्र बताते हैं कि इस मामले में कुछ ही दिनों के भीतर फैसला भी ले लिया जायेगा। अभी नाम उजागर इसलिये नहीं किया जा रहा क्योंकि इन दोनों विधायकों ने अभी इस संबंध में अपना कोई स्पष्ट रुख जाहिर नहीं किया है। हालांकि भारतीय जनता पार्टी के संगठन सूत्रों को जैसे ही यह बात पता लगी वैसे ही इन दोनों विधायकों को शीघ्रता के साथ संगठन के लोगों ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह तक पहुंचाया। इन दोनों विधायको से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने अलग-अलग करके बात की और उनकी शिकायतें सुनी। दोनों ने अपना असंतोष जाहिर करते हुये स्थानीय स्तर से लेकर भोपाल तक हुई उपेक्षा के बारे में उन्हें बताया। इस दौरान श्री सिंह ने दोनों विधायकों को आश्वस्त किया कि उनके सम्मान में कहीं कोई कमी नहीं होगी।

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क्या होगा आगे?

सूत्र बताते हैं कि कमलनाथ सरकार ने भारतीय जनता पार्टी को सबक सिखाने के लिये यह रणनीति अपनाई है। कई प्रदेशों में कांग्रेस के विधायकों के भाजपा में जाने के बाद यह कहा जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस विधायकों को प्रलोभन देकर शामिल किया है। लिहाजा वहीं रणनीति अब मप्र में दिखाई देने लगी है। अगर ऐसा संभव होता है तो यह कोई बड़ी बात नहीं होगी। वहीं सूत्र बताते हैं कि विंध्य में इस राजनैतिक सरगर्मी के चलते कांग्रेस के एक कद्दावर नेता निराश होने के साथ अपने पार्टी प्रमुख से खासा नाराज हैं और इशारों ही इशारों में बीते दिनों उन्होंने अपनी नाराजगी से अवगत भी करा दिया है। 

दोनों विधायकों की अलग-अलग सांसदों से तकरार

यहां यह उल्लेखनीय है कि दोनों विधायकों की अपने-अपने क्षेत्र के सांसदो से खासी तकरार भी है। दोनों के मामले बयानबाजी तक आ चुके हैं। और तो और ये विधायक अपने-अपने जिले के सांसदों से खासा दुखी भी है। रीवा के उक्त संबंधी विधायक का दर्द स्थानीय पूर्व मंत्री से भी रहा है। अपने करीबी समर्थको से कई बार वे अपना दर्द बयां भी कर चुके हैं। क्योंकि उक्त राजनेता की वजह से विधायक जी का पत्ता हमेशा कटता ही रहा है। उधर सीधी के मामले में बताया गया है कि वर्तमान सांसद के अलावा राज्यसभा सांसद (आरएसएस के अत्यंत करीबी) की वजह से उन्हें भी गच्चा ही खाना पड़ा। खास बात यह रही कि भाजपा के जमाने में सीधी जिला मंत्री पद के लिये तरस गया। 

दोनों विधायको को 15 साल तक मिला है केवल झटका 

ये दोनों विधायक अपने-अपने इलाके के कद्दावर नेताओं में गिने जाते हैं। वर्ष 2003 में जब इन दोनों नेताओं ने अपने विरोधी कद्दावर नेताओं को हराया था तभी पार्टी ने इन्हें यथोचित सम्मानजनक स्थान देने का वायदा किया था। उस दौरान भाजपा नेताओं ने चुनाव में जनता को वायदा किया था कि आप इन्हें भेजिये, ये सरकार चलायेंगे। लेकिन सरकार बनने के बाद एक बार तो छोडिय़े, तीन बार में इनका कभी नाम तक न आया। लिहाजा इन दोनों नेताओं की नाराजगी बढ़ती गई। 

नारायण और शरद का हो गया फाइनल?

यहां यह उल्लेखनीय है कि मैहर विधायक नारायण त्रिपाठी और व्यौहारी विधायक शरद कोल आज गुरुवार को भोपाल में हुई पार्टी के विधायकों की बैठक में शामिल तक नहीं हुये। जिससे ऐसा माना जा रहा है कि वे अब पूरी तरह कांग्रेस में शामिल हो गये हैं? उधर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने भोपाल में सफाई दी कि उनके न आने की जानकारी पहले से थी और वे व्यक्तिगत कारणों से बाहर हैं। जबकि सच्चाई यह है कि दोनों विधायक फिलहाल भोपाल में ही हैं। लिहाजा घटनाक्रम का अंदाजा लगाया जा सकता है।      

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