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बसपा सुप्रीमो मायावती ने भेजा संदेश : पुराने नेताओं को फिर से लाया जाये पार्टी में

 रीवा। बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती (BSP Chief Mayawati) के एक संदेश से स्थानीय नेता हतप्रभ से हैं। सुप्रीमों ने कहा है कि जो नेता पिछले दो सालों के अंदर पार्टी छोड़-छोड़ कर दूसरे दलों में जा चुके हैं उन्हें फिर से वापस लाने की पहल की जाये। इसके लिये पिछले दिनों लखनऊ में हुई बैठक के बाद क्षेत्रवार नेताओं को जिम्मेदारियां भी सौंपी गई है। बसपा के यूपी के पदाधिकारियों को इसके लिये अभी से लग जाने को कहा गया है। 
बसपा सुप्रीमो मायावती ने भेजा संदेश : पुराने नेताओं को फिर से लाया जाये पार्टी में

उल्लेखनीय है कि बहुजन समाज पार्टी में बड़े नेताओं का टोंटा हो गया है। तीन सांसद देने वाली इस पार्टी का हाल यह है कि अब कोई भी पुराना सांसद अपनी ही पार्टी में नहीं है वह दूसरे दलों की बाह-बाह कर रहा है। इसी प्रकार विंध्य क्षेत्र के सातो पूर्व विधायक कांग्रेस या भाजपा में जिंदावाद के नारे लगा रहे हैं। वर्तमान में बहुजन समाज पार्टी की स्थिति यह बन गई है कि किसी भी कार्यक्रम के लिये स्थानीय स्तर पर कद्दावर नेता ढूंढे नहीं मिलता। उक्त संबंध में हमारे बसपा सूत्रों ने बताया है कि म.प्र., राजस्थान में पार्टी को पूर्व स्थिति में लाने के लिये एक बार फिर बसपा सुप्रीमो मायावती तेजी से सक्रिय हो चुकी हैं। उन्हें यह ज्ञात हो चुका है कि जिस प्रकार की स्थितियां फिलहाल चल रही हैं अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में पार्टी का नाम लेने वाला कोई नहीं बचेगा। 

म.प्र. में विंध्य और चंबल में था जनाधार 

यहां यह उल्लेखनीय है कि बहुजन समाज पार्टी का विंध्य क्षेत्र में अपना एक बड़ा जनाधार बन गया था। यही स्थिति ग्वालियर और चंबल संभाग में भी थी। बहुजन समाज पार्टी की बेहतर स्थिति के चलते कई बार भाजपा और कांग्रेस के बड़े-बड़े नेता अपनी सेटिंग बनाने बसपा सुप्रीमो के आगे नतमस्तक हो जाया करते थे। विंध्य क्षेत्र के रीवा लोकसभा से बसपा ने तीन बार जीत हासिल की तो सतना जिले से दो बार। इसी प्रकार विधानसभा चुनावों में तो सन 90 के बाद लगातार कम से कम तीन से चार विधायक इस क्षेत्र से चुने जाते रहे। 2018 का विधानसभा चुनाव तीन दशको के बीच में पहला ऐसा चुनाव था जब पहली बार बसपा का कोई प्रतिनिधि जीतकर नहीं पहुंच पाया। 

कई नेता कर सकते हंैं घर वापसी 

बहुजन समाज पार्टी छोड़ कर अन्य दलों में गये दर्जनों कद्दावर नेताओं की घर वापसी हो सकती है। इसके बारे में सूत्र बताते हैं कि जो नेता दूसरे दलों में जा चुके हैं उनसे बसपा के शीर्षस्थ नेताओं ने बात करना शुरू कर दिया है। पार्टी सुप्रीमो मायावती के बाद दूसरे बड़े नेता व राज्यसभा सांसद सतीश मिश्र ने इस मामले में ज्यादा रुचि दिखाई है। इसके पीछे का कारण यह है कि ज्यादातर नेता मायावती से नहीं मिल पाते थे और सतीश मिश्र से ही मिलकर अपना काम पूरा करते थे। मप्र के ज्यादातर नेता सतीश मिश्र से ही जुड़े रहे हैं। लिहाजा उन्होंने मप्र और चंबल इलाके के उन नेताओं को फिर से पार्टी में लाने के लिये अपनी ताकत लगाना शुरू कर दी है। 

चले तो गये लेकिन नहीं मिल रहा भाव

वर्तमान में स्थिति यह है कि बहुजन समाज पार्टी से कांग्रेस और भाजपा में गये नेता मानसिक रूप से संतुष्ट नहीं है। ऊपरी स्तर पर बड़े नेताओं से सदस्यता लेकर और फोटो खिंचवा कर चर्चाओं में तो आ गये लेकिन स्थानीय स्तर पर पुराने नेता उन्हें अपना मानने को तैयार ही नहीं है। सूत्र बताते हैं कि बसपा से कांग्रेस में आये नेता मानसिक रूप से परेशान हैं क्योंकि कांग्रेस में उनका न तो वजूद है और न ही उनके व्यक्तिगत समर्थकों के कोई काम होते हैं। जिससे उनके समर्थक भी लगातार घटते जा रहे हैं। अगर बसपा सुप्रीमो ने यह अभियान तेजी से चलाया तो यह माना जा रहा है कि कई नेता अपनी पुराने घर की वापसी को आसानी से तैयार हो जायेंगे। 

आपसी द्वन्द के चलते बनी यह स्थिति

यहां यह उल्लेखनीय है कि बहुजन समाज पार्टी सन 2000 के दशक में शिखर पर थी तभी से इस पार्टी में भी अन्य पार्टियों की भांति काटा-नासी का दौर शुरू हो गया था। एक नेता दूसरे नेता को काटने के लिये पूरी ताकत लगा रहे थे। इसका सबसे पहले शिकार हुये थे जयकरण साकेत और डा. आईएमपी वर्मा। पार्टी ने जैसे-जैसे नये लोगों के हाथों में कमान सौंपी वैसे-वैसे पार्टी की स्थितियां गड़बड़ होती चली गई। आज हालत यह है कि पार्टी के पूर्व सांसद बुद्धसेन पटेल भाजपा में हैं तो पूर्व सांसद देवराज कांग्रेस में। इसी प्रकार लगभग सभी पूर्व विधायक फिलहाल कांग्रेस में जिंदावाद के नारे लगा रहे हैं। लेकिन स्थानीय स्तर पर उनकी पूंछ-परख शून्य की स्थिति में है। 

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