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बंद होने की कगार पर रीवा का कैंसर यूनिट, चार महीने से नहीं मिली कर्मचारियों को तनख्वाह

रीवा।  संजय गांधी अस्पताल अन्तर्गत एन.जी.ओ. के सहयोग से संचालित  कैंसर यूनिट अब बंद होने की कगार पर है। अधिकारियों की अनदेखी, प्रशासन का असहयोग भी इसके लिये जिम्मेदार माना जा रहा है। वहीं प्रदेश की सरकार भी अभी तक इस मामले में गंभीर नहीं है। अगर संजय गांधी अस्पताल का कैंसर यूनिट काम करना बंद करता है तो विंध्य क्षेत्र के कैंसर पीडि़त असमय ही मौत के शिकार बनेंगे, ऐसा माना जा रहा है। 
बंद होने की कगार पर रीवा का कैंसर यूनिट, चार महीने से नहीं मिली कर्मचारियों को तनख्वाह

उल्लेखनीय है कि लगभग पांच वर्ष पूर्व स्वयंसेवी संस्था के सहयोग से एवं संजय गांधी अस्पताल प्रबंधन की देख-रेख में भूतल अन्तर्गत कैंसर यूनिट स्थापित की गई थी। जहां पर पीडि़तों को कीमोथेरेपी उपलब्ध कराई जाती है वहीं सामान्य पाडि़तों को रेडियोथेरेपी भी की जाती है। यूनिट से जुड़े सूत्र बताते हैं कि 35 से 40 मरीज औसतन कीमोथेरेपी के लिये भर्ती रहते हैं। वहीं औसतन 25 लोगों की रेडियोथेरेपी रोजाना होती है। खास बात यह है कि कैंसर जनित बीमारी का उपचार लेने रीवा में इस समय संभाग अन्तर्गत सिंगरौली, सीधी, शहडोल, सतना, पन्ना सहित रीवा जिले के विभिन्न ग्रामीण इलाकों के मरीज यहां उपलब्ध सुविधाओं का लाभ उठाते हैं। 
राज्य गरीबी योजना व आयुषमान योजना के तहत यूनिट में मरीजों का पूर्ण उपचार होता है। जिसकी पूर्ण राशि शुरूआती दौर में स्वयं सेवी संगठन द्वारा किया जाता है। बाद में जिन मरीजों को इस योजना का पात्र पाया जाता है उनके लिये राशि का भुगतान राज्य सरकार से प्राप्त होता। बताया गया है कि फिलहाल वर्ष 2017-18 में भर्ती मरीजों की ही काफी राशि का भुगतान रीवा कैंसर यूनिट को अभी तक उपलब्ध नहीं हो पाया है। जिससे व्यवस्थाएं चरमरा सी गई है। स्वयंसेवी संगठन द्वारा उपलब्ध कराये गये पैरामेडिकल से जुड़े 42 कर्मचारियों का मानदेय भी लगभग पांच महीने से लंबित हो गया है। जबकि चिकित्सकीय स्टाफ को मिलने वाला मानदेय पिछले एक साल से नहीं मिल पा रहा है। इसमें से अधिकांश कर्मचारी बाहरी हैं लिहाजा वे इन दिनों खासा परेशान है। कर्मचारियों ने बताया कि जब भी वे वेतन की मांग करते हैं तो प्रबंधन स्वयं अपनी परेशानी व्यक्त करने लगता है। इस हालत में अब कर्मचारी काम कर पाने की स्थिति में नहीं है। लिहाजा कर्मचारियों ने चेतावनी दे दी है कि यदि अगले सोमवार यानि कि 8 जुलाई तक उन्हेंं वेतन नहीं प्रदाय होता तो वे काम बंद कर देंगे। 

परेशान हो जायेंगे मरीज

यहां यह भी उल्लेखनीय तथ्य है कि भर्ती होने वाले औसतन 40 मरीजों में से लगभग सभी कीमोथेरेपी कराने आते हैं इसकी एक निर्धारित तिथि होती है। जिसके 24 घंटे के अंदर कीमोथेरेपी कराना अनिवार्य रहता है। खास बात यह है कि रीवा और आसपास के इलाकों में यह सुविधा केवल संजय गांधी अस्पताल में ही मौजूद है। इसके बाद यह सुविधा जबलपुर या भोपाल में है। सूत्र बताते हैं कि भर्ती होने वाले 40 मरीजों में से अधिकांश अत्यंत गरीब रहते हैं तथा राज्य गरीबी योजना व आयुषमान योजना पर ही निर्भर है। अगर दुर्भाग्य से चार-छ: दिन के लिये भी यह सुविधा बंद हुई तो कई मरीजों की जान पर भी खतरा मंडरा सकता है। 

शासन को भी दे दी गई है जानकारी

सूत्रों ने बताया है कि स्वयं सेवी संगठन ने अपने स्तर पर संचालनालय भोपाल को लगातार जानकारी भेजी है। लेकिन अभी तक वहां से कोई फंड यहां पर नहीं भेजा गया है। जिससे दिक्कते उत्पन्न हो रही है। हालांकि हमारा प्रयास है कि कर्मचारियों को किसी प्रकार व्यवस्थित किया जाये ताकि मरीजों को दिक्कत उत्पन्न न हो। कैंसर यूनिट के प्रभारी ओमेश मार्को का मानना है कि इस दिशा में शासन, प्रशासन एवं प्रबंधन को गंभीरता से तत्काल निर्णय लेना चाहिये। जबकि संजय गांधी अस्पताल के प्रमुख व श्यामशाह चिकित्सालय के डीन डा. पीसी द्विवेदी ने बताया है कि शासन को अवगत करा दिया गया है। पूरे प्रयास चल रहे हैं। हमारा प्रयास है कि कर्मचारियो की व्यवस्था कराई जाये ताकि पीडि़त मरीजों का उपचार बेहतर तरीके से होता रहे। 

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