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विपक्ष में रहना रास नहीं आता नारायण को?

रीवा। श्रीमन नारायण यानि भगवान विष्णु। भगवान विष्णु वहीं रहते थे जहां उनकी माननीया लक्ष्मी वास करती थीं। यानि कि नारायण वहीं रहेंगे जहां लक्ष्मी रहेंगी। यथा नाम तथा गुण। ऐसे ही हैं अपने नारायण त्रिपाठी। मैहर विधायक नारायण त्रिपाठी को विपक्ष रास नहीं आता। क्योंकि वे नारायण हैं। इन दिनों नारायण त्रिपाठी एक बार फिर कांग्रेस में जाने को लेकर चर्चाओं में बने हुये हैं। पिछले दिनों विधायक दल की बैठक में न रहने को लेकर भी चर्चाओं में थे। वहीं दूसरी ओर मैहर में गत दिनों हुई गोपनीय बैठक के बाद इस बात की चर्चा पुन: बढ़ गई है कि नारायण भाई अब भाजपा छोड़ कांग्रेस में जल्द आ रहे हैं। यह बात कितनी सही है और कितनी झूठी, यह तो वक्त बतायेगा? 

संभागीय मुख्यालय रीवा में आज इस बात की चर्चा जोरों पर थी कि मैहर विधायक एक बार फिर पाला बदलते हुये कांग्रेस में आ रहे हैं और इसी महीने उनकी कांग्रेस में वापिसी होगी? मैहर के कांग्रेस नेता कुछ हद तक विचलित भी हैं और कुछ हद तक उत्साहित भी। क्योंकि अगर नारायण त्रिपाठी कांग्रेस में शामिल होते हैं तो उनके नेताओं की संख्या बढ़ जायेगी। कुछ विचलित इसलिये हैं कि यदि नारायण त्रिपाठी आयेंगे तो चुनाव लडऩे का मौका कांग्रेस उन्हें पुन: देगी। लेकिन कांग्रेसी यह भी कहते हैं कि नारायण भाई रहेंगे कितने दिन इसका कोई भरोसा नहीं है। क्योंकि अब तक में वे आठ बार पाला बदल चुके हैं। विपक्ष में रहना उन्हें पसंद नहीं है। 
तत्संबंध में बताया गया है कि श्री त्रिपाठी की राजनैतिक शुरूआत 25 साल पहले यूथ कांग्रेस से ही हुई थी। इसके बाद  सरला नगर सीमेंट फैक्ट्री में हुये विवादों के पश्चात वे चर्चाओं में आये थे। कांग्रेस में मौजूद सीनियर और घाघ नेताओं के आगे जब श्री त्रिपाठी की नहीं चली तो उन दिनों के जनता दल यूथ के नेता गणेश सिंह के साथ जनता दल की राजनीति करने लगे। दो-ढाई सालों में ही जब श्री त्रिपाठी का जद से मोह भंग हुआ  तो दिग्विजय सिंह कार्यकाल में कांग्रेस में शामिल हो गये। यहां पर विधानसभा टिकट मांगी और टिकट नहीं मिली तो सपा के साथ चले गये। सपा ने टिकट दिया, सौभाग्य से वे जीत भी गये। बाद में विधायक दल के नेता और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष भी बन गये। टिकट वितरण को लेकर चर्चाओं में रहे नारायण त्रिपाठी का जब पार्टी संगठन में विरोध हुआ और गंभीर स्थिति बनती दिखी तो श्री त्रिपाठी ने सपा ही छोड़ दी और कांग्रेस में आ गये। 2013 के चुनाव के पूर्व जब श्री त्रिपाठी ने कांग्रेस ज्वाइन किया तो पत्रकारों के बीच यही कहा था कि वे अपनी मातृ पार्टी में आ गये हैं, अब यहीं रहेंगे। कांग्रेस ने टिकट दिया और जीत भी गये। लेकिन 2014 में जब सतना से अजय सिंह राहुल लोकसभा चुनाव लड़े तो श्री त्रिपाठी की इन्हीं से ठन गई। साथ ही यह आरोप भी लगा कि अजय सिंह राहुल की हार नारायण त्रिपाठी की वजह से हुई। उधर नारायण भाई ने एक बार फिर गेम खेला और डेढ़ साल कांग्रेस के विधायक रहने के बाद इस्तीफा देने के साथ भाजपा ज्वाइन कर ली। उपचुनाव हुआ और भाजपा से श्री त्रिपाठी विधायक बन गये। इधर 2018 के चुनाव में नारायण त्रिपाठी पुन: विधायक चुन लिये गये। लेकिन सरकार कांग्रेस की बन गई। उधर लोकसभा चुनावों के कुछ दिन पहले से श्री त्रिपाठी की सांसद गणेश सिंह से ठनी हुई है। लिहाजा चर्चा इस बात की है कि नारायण त्रिपाठी चंद दिनों के भीतर कांग्रेस में जा सकते हैं। कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया  से हुई मुलाकात इसके संकेत माने जा रहे हैं। 

क्या ऐसा संभव दिखता है?

नारायण त्रिपाठी का कांग्रेस प्रेम और पुन: पार्टी में वापसी क्या संभव है? इस बात को लेकर रीवा और मैहर के सियासी हल्कों में काफी चर्चा छिड़ी हुई है। मैहर के कांग्रेसी कहते हैं कि कांग्रेस में आना बुरी बात नहीं है। फिर उपचुनाव होगा और नारायण भाई जीत भी सकते हैं। लेकिन मंत्री कैसे बन पायेंगे क्योंकि केपी सिंह जैसे लोग अभी तक मंत्री न बन पाने से नाराज हैं और विधानसभा की सदस्यता लेने के बाद दुबारा सदन तक नहीं गये हैं। ऐसे ही कई विधायक बैठे हुये हैं जिनका गुस्सा बरकरार है। कमलनाथ जी सब समझते हैं हो सकता है एक विधायक बढ़ाने के लिये कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने यह दांव चला हो। लेकिन समीक्षक यह कहते हैं कि यदि नारायण त्रिपाठी ने पाला बदला तो कुछ खास हासिल हो पायेगा या नहीं, इसमें सौ फीसदी संशय है। 
लोग मानते हैं मैहर का जिला बनना संभव नहीं
इस मुद्दे पर कई सीनियर नेता यह मानते हैं कि विंध्य में मऊगंज और व्यौहारी को जिले का दर्जा तो मिल सकता है लेकिन मैहर को जिला का दर्जा मिल पाना असंभव सा है। क्योंकि मैहर से सतना की दूरी महज 36 किमी. ही है। फिर मैहर में किस विकासखण्ड को समाहित करेंगे। क्योंकि सतना की भौगोलिक स्थिति ही ऐसी है कि उसमें काट-छांट कर नया जिला बना पाना संभव नहीं दिखता। पुरानी सर्वे रिपोर्ट में यह बात आ चुकी है। घोषणा करने को चाहे जो घोषणा हो जाये लेकिन जिला बनाना इतना सामान्य नहीं है। 

हुई थी क्षेत्रीय लोगों से गोपनीय बैठक 

सूत्र बताते हैं कि लगभग एक सप्ताह पूर्व मैहर विधायक नारायण त्रिपाठी ने अपने अत्यंत विश्वसनीय क्षेत्रीय समर्थकों को   अपने मैहर निवास में बुलाया और पूंछा कि क्या मैहर के विकास के लिये और जिला बनाने के लिये पार्टी बदल दिया जाये तो कैसा रहेगा? समर्थक तो समर्थक, सब ने एक स्वर में कहा बिल्कुल निर्णय लिया जाये। श्री त्रिपाठी का मतलब यह था कि  अगर मुख्यमंत्री कमलनाथ उन्हें मंत्री बनाने का वायदा करें और मैहर को जिला बनायें तो क्या ऐसा किया जा सकता है। समर्थक बड़े प्रसन्न है कि उनके भइया मंत्री बन जायेंगे और जिला वाले काम के लिये अब उन्हें सतना नहीं जाना पड़ेगा। इस बीच हमारे सूत्रों ने बताया कि विधायक जी ने अपने सभी समर्थको के मोबाइल तक बाहर रखवा दिये थे ताकि कोई रिकार्डिंग आदि न कर सके। अलबत्ता चर्चा जोरों में है कि नारायण भाई अब जल्दी ही कांग्रेस में जायेंगे और फिर दोबारा चुनाव जीत कर मंत्री बनने के साथ मैहर को जिला बना कर लायेंगे? इस बीच अपने समर्थकों से उन्होंने दो-तीन नाम और लिये जो कांग्रेस में आने को उत्सुक हैं। नारायण त्रिपाठी की पुरानी क्षमताओं को देखते हुये ऐसा माना जा रहा है कि ऐसा हो भी सकता है।

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