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युवा कांग्रेस को सक्रिय बनाने कवायद शुरू

 रीवा। शून्य सी पड़ी युवा कांग्रेस इकाई को सक्रिय करने की कवायद शुरू हो गई है। पिछले विधानसभा व लोकसभा चुनावों में करारी हार के बाद यह माना गया कि युवाओं का साथ पूर्ण रूप से नहीं मिला। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण संगठन ने माना है कि तेज-तर्रार युवाओं की कांग्रेस में खासी कमी है। इस परिप्रेक्ष्य में प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भी तत्परता के साथ काम करने के निर्देश दिये हैं। 

उल्लेखनीय है कि रीवा में युवा कांग्रेस की दयनीय दशा पर विंध्य भारत ने एक गंभीर रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इस रिपोर्ट की कापियां जब भोपाल में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों ने देखी तो पदाधिकारियों ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया और तत्काल ही इस मामले में स्थानीय संगठन को सक्रियता के साथ तेज-तर्रार युवाओं की तलाश के लिये निर्देशित किया। सूत्र बताते हैं कि अबकी बार युवा कांग्रेस में युवाओं को बेहतर तरीके से पहले प्रशिक्षित किया जायेगा, इसके बाद इन्हें क्षेत्रों में भेजा जायेगा। युवा कांग्रेस के इन प्रशिक्षित युवाओं को बताया जायेगा कि जन सामान्य के बीच अपनी और पार्टी की इमेज इस प्रकार बनानी है। इनमें से कुछ को चिन्हित कर पदाधिकारियों के रूप में भी रखा जायेगा। 
सूत्र बताते हैं कि आठो विधानसभा क्षेत्रों में चयनित किये जाने वाले इन कार्यकर्ताओं में से सभी वर्गों का समावेश रहेगा। सवर्ण, ओबीसी, अजा-जजा वर्ग से एक-एक युवा शामिल रहेंगे। इसके पीछे मुख्यत: कारण यह है कि एक ओर जहां युवाओं का जुड़ाव कांग्रेस से होगा वहीं हर वर्ग के युवा को कांग्रेस से जोडऩे की जिम्मेदारी इन्हें दी जायेगी। माना जा रहा है कि इससे युवा कांग्रेस सशक्त होगी और आने वाले दिनों में कांग्रेस मजबूत होगी। 

एक ओर इस्तीफे तो दूसरी ओर बंट रहे हैं पद 

राष्ट्रीय कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद इस्तीफों की होड़ सी मच गई थी। पूरे देश भर से नेता और कार्यकर्ता इस्तीफा देने के लिये आतुर दिखाई दे रहे थे। वहीं अभी म.प्र. में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। इसके ठीक विपरीत प्रदेश कांग्रेस सेवादल ने अब पदाधिकारियों के नियुक्ति की ठान ली है। हाल ही में सेवादल की प्रदेश इकाई में जिला अध्यक्षों की तैनाती कर दी। रीवा में भी शहर और ग्रामीण इकाई अन्तर्गत अध्यक्ष मनोनीत कर दिये गये हैं। जिसमें खास बात यह है कि जिन्हें पदाधिकारी या जिला स्तर का अध्यक्ष घोषित किया गया है उनकी किसी राजनैतिक हैसियत के बारे में किसी को नहीं मालुम है। फिर भी घोषणा तो हो ही गई। अब सवाल यह उठता है कि जब प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर में इस्तीफे का दौर चल रहा हो तो ऐसे में क्या नियुक्तियां उचित थी। क्योंकि प्रदेश का जो नया अध्यक्ष होगा वह प्रकोष्ठों में अपने हिसाब से प्रदेश के अन्य संयोजकों या अध्यक्षों की नियुक्ति करेगा। जिसके बाद यह नियुक्तियां अपने आप समाप्त मानी जायेगी। 

65 फीसदी युवाओं का मुद्दा होगा अब तेज

सामान्य तौर पर यह माना जा रहा है कि क्षेत्र में 65 फीसदी से ज्यादा युवा हैं। जिनकी वजह से ही सरकार की अल्टी-पल्टी हो जाती है। पिछले चुनाव में यह मुद्दा उठा तो लेकिन मोदी फैक्टर के आगे दब गया। दूसरी ओर भाजपा का युवा मोर्चा सशक्त तरीके से मैदान में मौजूद रहा। वहीं युवा कांग्रेस में कार्यकर्ताओं की खासी कमी रही जिसकी वजह से स्थितियां कुछ विपरीत सी हो गई थीं। लिहाजा कांग्रेस खुद भी शून्य में पहुंच गई। वर्तमान में कांग्रेस का एक भी जनप्रतिनिधि विधानसभा व लोकसभा में मौजूद नहीं है। युवा कांग्रेस को मजबूत करने के लिये प्रदेश कांग्रेस की यह पहल कारगर साबित हो सकती है। 

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