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रेवांचल हुई फुल, कांग्रेसियों को मिला काम

 रीवा। ट्रांसफर के सीजन में इस समय स्थानीय कांग्रेस नेताओं की पूछ-परख बढ़ गई है। सालों से जमें कर्मचारियों को एक बार फिर यथावत रखने लेटर पैड का उपयोग हो रहा है। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि चुनाव हारने के बाद स्थानीय नेताओं को प्रदेश के मंत्री भी ज्यादा भाव नहीं दे रहे हैं। जिससे स्थानीय नेता कई बार मायूष भी हो रहे हैं और उनकी किरकिरी भी हो रही है। 

पिछले 20 जून से एक बार फिर तबादलों की सूची का क्रम जारी है। विभिन्न विभागों की सूचियां एक ओर जहां भोपाल से जारी हो रही हैं तो दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर भी तबादलों का क्रम जारी है। शासन और प्रशासन द्वारा यह कहा जा रहा है कि तबादलों की अंतिम सूची 10 जुलाई के बाद नहीं जारी होगी। लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि अभी भी यह क्रम 20 जुलाई तक चलता रहेगा और बैक डेट पर तबादला का क्रम जारी रहेगा। 
यहां यह उल्लेखनीय तथ्य है कि लगभग 90 फीसदी विभागों के प्रमुखों का तबादला इस बार हुआ है। काफी दिनों से जो जमें हुए थे उन्हें राज्य सरकार ने एक झटके में इधर से उधर कर दिया है। अब वे अधिकारी स्थानीय कांग्रेस नेताओं की शरण में जा पहुंचे और नेताओं ने भी उन्हें आश्वस्त किया कि एक बार उनका तबादला निरस्त हो जाएगा।  इसी प्रकार विभागों के लगभग 25 फीसदी कर्मचारी इधर से उधर कर दिए गए हैं। अब वे भी छटपटा रहे हैं कि किसी प्रकार रीवा में जमें रहें। उधर कांग्रेस नेताओं की शरण में पहुंचे अधिकारी आश्वासन मिलने के बाद साथों-साथ भोपाल में मंत्रियों के दरवाजें खटखटा रहे हैं। लेकिन विधानसभा सत्र शुरू होने के कारण मंत्रियों को फुर्सत नहीं है। दूसरी ओर बजट सत्र चालू हो जाने के कारण इस दिशा में कोई नेता ज्यादा ध्यान नहीं दे रहा है। इसके साथ ही दूसरा महत्वपूर्ण कारण यह भी है कि रीवा के नेताओं को भोपाल के मंत्री कुछ खास भाव नहीं दे रहे, क्योंकि यहां कोई जनप्रतिनिधि ही नहीं है। मंत्री भी स्पष्ट रूप से कह रहे हैं कि आप सीधे संगठन स्तर के पदाधिकारी का पत्र जरूर लेकर आएं तभी कुछ सोचा जाएगा। वहीं संगठन के पदाधिकारी तबादलों से अपना पल्ला झाड़ चुके हैं। अधिकारी परेशान हैं कि अब कहां से सेटिंग की जाए। 
रीवा-पीडब्लूडी के चर्चित कार्यपालन यंत्री नरेन्द्र शर्मा, सहायक यंत्री सुधीर शुक्ला, स्वास्थ्य विभाग अंतर्गत दो उप संचालक समेत पशु चिकित्सा विभाग के उप संचालक एवं परिवहन विभाग में सालों से जमें अधिकारी अपने तबादलें कैंसिल कराने के लिए नेताओं के पीछे चक्कर लगा रहे हैं। पीडब्लूडी के अधिकारियों का कहना है कि तबादलें होते हैं, और फिर निरस्त होते हैं। जो गेम है वो खेला जाएगा। बाकी कैंसिल तो हो ही जाएगा। वहीं कई कर्मचारी भी यह दावे करते घूम रहे हैं कि तबादला हुआ है तो निरस्त भी होगा। प्रक्रिया पुरानी है, उसका पालन होगा और थोड़ा सा वक्त लगेगा, लेकिन मनमाफिक जगह लौटकर आ जाएंगे। 

स्थानीय तबादलों को लेकर खींचातानी

जिला स्तर पर हुए तबादलों को लेकर कांग्रेसियों में आपस में ही खींचातानी का दौर चल रहा है। जिला पंचायत में इक्का-दुक्का नेताओं को छोड़कर किसी नेता की नहीं चलने पाई। जिला पंचायत अध्यक्ष की अनुंशसा पर लगभग 80 सचिवों के स्थानांतरण कर दिए गए हैं। अब क्षेत्रीय स्तर के नेता अपने क्षेत्रीय सचिवों को लेकर चक्कर लगा रहे हैं। जिला स्तर पर राजस्व विभाग में हुए स्थानांतरण कलेक्टर ओमप्रकाश श्रीवास्तव द्वारा आदेशित किये गए हैं। यहां भी नेताओं का जमघट और दूरभाष से संपर्क कर कैसिलेशन कराने की गुहार लगाई जा रही है। यहां पर भी सूत्र बताते हैं कि न तो जिला पंचायत अध्यक्ष व सीईओ स्थानीय कांग्रेसियों को भाव को दे रहे और न ही कलेक्टर। उधर पुलिस महकमे में भी चार-चार की लिस्ट धीरे-धीरे जारी हो रही है। इसमें भी केवल एक-दो नेताओं की ही चल पा रही है।  पुलिस अधीक्षक भी किसी को तवज्जों नहीं दे रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि ऊपर से जिस नेता के लिए संकेत मिले हैं केवल अधिकारी उसी की सुन रहे हंैं और किसी की नहीं। 

इस बार भाजपाई है मायूस

पिछले 15 सालों से तबादलों के सीजन में सक्रिय रहने वाले भाजपा नेताओं की इस बार कहीं भी नहीं चल पा रही है। अगर उनके पास कोई करीबी जा भी रहा है तो वे सीधे हाथ जोड़ लेते हैं। इक्का-दुक्का बड़े नेता जिनके संपर्क सीधे सीएम या मिनिस्टर से हैं वे अपने अत्यंत करीबियों का काम काफी गुपचुप तरीके से कराने की बात कह रहे हैं। लेकिन अभी इन भाजपा नेताओं ने कहीं किसी के लिए हाथ नहीं डाला है। सूत्र बताते हैं कि विभागीय अधिकारियों के मामले में तो भाजपा के बड़े नेता पूर्णत: शांत हैं।

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