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भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी द्वारा कांग्रेस को समर्थन देते ही सन्न हो गई भाजपा

शिव के सरोवर को छोड़ नारायण चले कैलाश
खाली मैदान देख नारायण ने बदला पाला
जिला बनाने की शर्त पर मैहर विधायक का कांग्रेस से समझौता
आठवीं बार अब पार्टी बदलेंगे मैहर के विकास के लिये
 रीवा। सतना जिले के मैहर विधानसभा क्षेत्र से चुने गये भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी ने एक बार फिर पाला बदल लिया। हालांकि श्री त्रिपाठी के लिये यह कोई नई बात नहीं है। उनकी सोच को दगा दिये जाने के रूप में नहीं देखा जा सकता, क्योंकि श्री त्रिपाठी को जिसने भी झटका दिया या दगा दिया तो विधायक श्री त्रिपाठी समय का इंतजार करते हैं और वक्त आने पर इतना तगड़ा झटका देते हैं कि सामने वाला चित्त हो जाता है। लिहाजा तीन महीने से सरकार गिराने का स्टेटमेंट देने वाले भाजपाई भी बुधवार को भोपाल में हुये नाटकीय घटनाक्रम के बाद से लगभग चित्त ही हो गये हैं। 
भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी द्वारा कांग्रेस को समर्थन देते ही सन्न हो गई भाजपा

गत दिवस मैहर विधायक नारायण त्रिपाठी और व्यौहारी विधायक शरद कोल की मुख्यमंत्री कमलनाथ से हुई गुफ्तगूं एवं उसके चार घंटे बाद प्रेस कान्फ्रेंस में साथ की बयानबाजी के बाद सियासी गर्माहट अपने आप बढ़ गई। सुबह गोपाल भार्गव ने कांगे्रेस सरकार को तीन महीने वाली सरकार बताया था। वहीं शाम होते-होते भाजपाईयों को कमलनाथ ने ऐसा संदेश दिया और पूरे मीडिया जगत में जो दिखाया उसके बाद से भाजपाईयों की बोलती ही बंद हो गई। दरअसल कर्नाटक में जो हुआ उससे कमलनाथ व्यक्तिगत तौर पर भी आहत थे। उन्होंने कर्नाटक के घटनाक्रम का अंत होने के बाद मध्यप्रदेश में ऐसी गुगली फेंकी कि एक झटके में दो विकेट उनके खाते में आ गये। वहीं कमलनाथ ने इस घटनाक्रम के बाद कांग्रेस के विरोधी खेमे को भी यह संदेश दे दिया है कि ज्यादा कूदने-फांदने और बोलने का प्रयास कम करिये। 
अब सवाल यह उठता है कि मैहर विधायक नारायण त्रिपाठी ने अपने राजनैतिक कैरियर में आठवीं बार पाला क्यों बदला। इसके पीछे की पृष्ठ भूमि में अगर जायें तो यह समझ में आता है कि नारायण त्रिपाठी कुछ जिद्दी किस्म के भी हैं। अगर उनसे किसी ने वायदा किया है तो उसे पूरा करो, नहीं तो वे अपना रास्ता अलग बनाने का प्रयास कर लेते हैं। हुआ यह कि उनकी राजनैतिक शुरूआत के दिनों की छोड़ कर बात करें तो सपा में लगातार छ: साल रहने के बाद पार्टी के कुछ नेताओं ने उन्हें ही काटना शुरू कर दिया था। लिहाजा वे कांग्रेस में चले गये। लेकिन कांग्रेस में उनके  करीबी लोगों ने ही जब अन्दर ही अन्दर श्री त्रिपाठी की मुखालफत करा दी तो वे भाजपा की ओर झुके। तब ये विधायक थे। शिवराज सिंह चौहान से मीटिंग के बाद दो शर्तों पर वे भाजपा में आये थे। पहला तो मंत्री बनायेंगे, दूसरा मैहर को जिला बनायेंगे। दोनों में शिवराज सिंह असफल हुये। इसके बाद भी नारायण त्रिपाठी सब कुछ देखते सुनते रहे। अब उसके बाद कांग्रेस की सरकार आई, जिसके बारे में कमलनाथ के नजदीकी सूत्र बताते हैं कि नारायण त्रिपाठी को मंत्री बनाये जाने के अलावा मैहर के विकास के मुद्दे पर विशेष पैकेज की बात मानी है। जिला बनाने का मामला तकनीकी तौर पर अटक रहा है। सूत्र बताते हैं कि कमलनाथ ने स्पष्ट रूप से कहा है कि आप घर वापस आओ, जो बोलोगे होगा। जिला बनना थोड़ा सा कठिन है, फिर भी देखेंगे। इसके बाद तो नारायण त्रिपाठी तो 90 फीसदी कांग्रेस के हो चुके हैं। 

नारायण के कांग्रेस में आने से फायदे

नारायण त्रिपाठी कांग्रेस में लगभग आ से चुके हैं। तकनीकी तौर पर फिलहाल भाजपाई ही हैं। इनके कांग्रेस में आने से कुछ हद तक पार्टी को फायदा भी हो सकता है। नारायण त्रिपाठी मैहर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में सभी वर्गो में अपनी पैठ रखते हैं। दूसरा यह कि भाजपा का एक विधायक टूटा तो इसका संदेश कांग्रेसजनों में अच्छा जायेगा। तीसरा यह कि राजनीति के माहिर खिलाड़ी नारायण त्रिपाठी मैहर के विकास के लिये ताकत लगायेंगे। चौथा जोड़-तोड़ के खिलाड़ी नारायण और भी कई विधायकों को कमलनाथ की चौखट तक ले जायेंगे। पांचवा यह कि नारायण त्रिपाठी अगर पूरी तरह कांग्रेस के हुये तो इसका श्रेय भाजपा सांसद गणेश सिंह द्वारा उनकी की गई बेइज्जती को जायेगा। 

क्या-क्या हो सकता है नुकसान?

मैहर विधायक नारायण के कांग्रेस में आने से दूसरा पहलू नुकसान होने का भी है। पहला तो यह कि मैहर विधानसभा क्षेत्र के अधिकांश कांग्रेसी अब नारायण त्रिपाठी को पसंद नहीं करते हैं। इनके कांग्रेस में आने के बाद कई कांग्रेसी भाजपा में चले गये थे। जब ये भाजपा में गये तो वे कांग्रेसी हो गये। दूसरा नुकसान कांग्रेस की राजनीति में यह होगा कि क्षेत्र में गुटबाजी काफी बढ़ जायेगी। श्रीकांत चतुर्वेदी के समर्थक नारायण को बर्दाश्त नहीं कर पायेंगे। वहीं दिग्गज नेता अजय सिंह राहुल के करीबी लोग भी नारायण त्रिपाठी के पुराने घटनाक्रम को नहीं भुला पायेंगे। इसी प्रकार मैहर के सूत्र बताते हैं कि नारायण त्रिपाठी के आने के बाद से उनके अधिकांश समर्थक अगर कांग्रेस में आते हैं तो इस घटनाक्रम से भनभनाये कांग्रेसी भाजपा में चले जायें तो कोई बड़ी बात नहीं होगी? 

...तो विंध्य में नारायण करेंगे कांग्रेस की अगुवाई?

नारायण त्रिपाठी ने पूरे संकेत दे दिये हैं कि अब वे कांग्रेसी होने वाले हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठने लगा है कि आने वाले दिनों में विंध्य क्षेत्र में कांग्रेस की कमान किसके पास रहेगी। वहीं यह कहा जा रहा है कि विंध्य में कांग्रेस की कमान आने वाले दिनों में नारायण त्रिपाठी के पास हो सकती है। अभी तक कांग्रेस की राजनीति में अजय सिंह राहुल का दबदवा हुआ करता था। लेकिन उनके लगातार दो चुनाव हार जाने के बाद उनका ग्राफ काफी हद तक गिरा है। राजनैतिक रूप से अजय सिंह राहुल और नारायण त्रिपाठी में कुछ मतभेद भी हैं। वहीं वर्तमान में सांसद गणेश सिंह को खुलेआम चेतावनी देने व सख्त लहजे के साथ बयानबाजी ने नारायण त्रिपाठी का मैहर समेत अन्य क्षेत्रों में भी दबदवा बढ़ा दिया है। वहीं मुख्यमंत्री कमलनाथ भी जिस तरीके से तरजीह दे रहे हैं उससे ऐसा लगता है कि विंध्य में कांग्रेस की अगुवाई अब नारायण त्रिपाठी के हाथों में ही होगी?   

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