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हो गई बसपा की सर्जरी, अब हो रही नई नियुक्तियां

रीवा। विंध्य क्षेत्र में कभी प्रमुख दल रहने वाले बसपा की स्थिति इन दिनों काफी कमजोर हो चुकी है। पार्टी को एक बार फिर शिखर पर लाने के लिये राष्ट्रीय संगठन सक्रिय हो चुका है। इसी क्रम में मप्र स्तर पर तथा स्थानीय स्तर पर पार्टी में सर्जरी के साथ नये सिरे से सक्रियता बढ़ाने नियुक्तियों का क्रम शुरू हो गया है। साथ ही जिन पर अभी पार्टी संगठन का पूरा भार था उन्हें या तो पूरी तरह से किनारे कर दिया गया है या फिर उन्हें प्रमोट करते हुये अन्य जिम्मेदारियां सौंपने का निर्णय ले लिया गया है। 
हो गई बसपा की सर्जरी, अब हो रही नई नियुक्तियां
इस मामले में सबसे पहले पार्टी प्रमुख की गाज जिला अध्यक्षों पर गिर चुकी है। प्रदेश के लगभग 70 फीसदी जिलों के जिला अध्यक्षों को हटा कर उनकी जगह नई नियुक्तियां की जा रही हैं। माना जा रहा है कि जिनके ऊपर जिले में सक्रियता बढ़ाने का भरोसा किया गया था वे कुछ कर पाने में असफल रहे और पार्टी कहीं भी बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाई है। इस बीच यह भी संभावना व्यक्त की गई है कि जो पुराने लोग पार्टी छोड़ कर दूसरे दलों में जा चुके हैं उन्हें भी पुन: वापस बुलाने का प्रयास किया जायेगा। 
विंध्य क्षेत्र अन्तर्गत रीवा और सतना में बहुजन समाज पार्टी का खासा जोर रहा है। इसी प्रकार सिंगरौली नगरीय क्षेत्र में बहुजन समाज पार्टी का अपना एक अलग दबदवा रहा। पार्टी सुप्रीमो की रणनीति के अनुसार जहां पर पार्टी ने पहले बेहतर प्रदर्शन किया था वहां एक बार फिर सक्रियता बढ़ाये जाने पर जोर दिया जा रहा है। रीवा और सतना के मामले में संगठन काफी गंभीर है। लिहाजा सब कुछ नये सिरे से किये जाने की रणनीति बनाई जा रही है। पार्टी में फिलहाल रीवा एवं सतना में लोकसभा प्रत्याशी क्रमश: विकास पटेल और अच्छेलाल कुशवाहा को प्रभारी घोषित कर दिया है। इनके ऊपर सभी विकासखण्ड क्षेत्रों में पार्टी को नई गति देने की जिम्मेदारी दी गई है। आगामी दिसम्बर से लेकर फरवरी के बीच तक नगरीय निकाय के चुनाव और इसके ठीक छ: महीने बाद त्रि-स्तरीय पंचायती राज के चुनाव होने तय हैं। ऐसे में पार्टी एक बार फिर सक्रिय होकर अपने प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ाना चाह रही है। फिलहाल बहुजन समाज पार्टी ने ऐसे लोगों को जिला अध्यक्ष पद पर बैठाने का निर्णय लिया है। जिसकी बेस वोट पर पकड़ हो और छवि बेहतर हो। 

प्रयोगों के चलते पार्टी की दुर्गति

पार्टी ने यह माना है कि पिछले पांच सालों में पदाधिकारियों के चयन, टिकटो के वितरण में पुरानों की अनदेखी के चलते पार्टी का यह हश्र हुआ है। वर्तमान में विंध्य क्षेत्र के सभी पुराने विधायक और सांसद बहुजन समाज पार्टी में अब नहीं है। इसके पीछे के भी कारणों का पार्टी ने पता लगाया है। जिसमें यह बात स्पष्ट हुई है कि प्रदेश स्तरीय संगठन के पदाधिकारियों ने कहीं न कहीं मनमानी की, जिसकी वजह से पार्टी  के पुराने दिग्गज नेताओं ने मजबूर होकर पार्टी छोड़ दी। 

अब पुराने तर्ज पर चलेंगे नेता 

एक बार फिर बहुजन समाज पार्टी अपनी पुरानी राह के साथ नई रणनीति बनायेगी। इसके अनुसार विकासखण्ड स्तर पर पार्टी की सक्रियता बढ़ेगी। साथ ही सेक्टर बनाते हुये पंचायतवार बेस वोट को अपने पक्ष में करने के लिये लगातार सक्रिय होगी। सूत्रों ने बताया है कि पार्टी सुप्रीमो मायावती अपने घटते बेस वोट को लेकर खासा चितिंत है। इस मामले में उन्होंने सख्त हिदायत देते हुये बेस वोट को पुन: वापस लाने की रणनीति बनाते हुये नये सिरे से पदाधिकारियों को सक्रिय करने की बात कही है। अकेले रीवा जिले में जिला स्तरीय कोर टीम बनेगी जो सेक्टर वार पार्टी को सक्रिय करने के लिये पूरी ताकत लगायेगी। 

कर्मचारी वर्ग पर विशेष नजर

इस नई रणनीति के तहत एक बार फिर जाति विशेष के कर्मचारियों पर पार्टी की नजर है। पहले इन्हीं की दम पर अच्छी खासी फण्डिंग होती थी और यही लोग पार्टी को व्यापक स्तर पर सक्रिय करने में अपनी भूमिका निभाते थे। रीवा जिले में हुआ यह कि पार्टी से अपरोक्ष रूप से जुडऩे वाले इन कर्मचारियों के कई नेता विधायक और सांसद तक हो गये। लेकिन जब पार्टी ने उन्हें ही दर-किनार कर दिया तो इन कर्मचारियों ने भी रुचि लेना समाप्त कर दिया। यहां यह बता दें कि बामसेफ और अपाक्स के बारे में यही माना जाता रहा है कि उक्त संगठन कहीं न कहीं बसपा को अन्दर से समर्थन देते हैं और दोनों का प्रभाव तथा दबाव सरकार पर रहता था। लेकिन पार्टी की वर्तमान गतिविधियों के चलते इन दोनों संगठनों ने भी सहयोग और समर्थन देना लगभग बंद कर दिया। फलस्वरूप पार्टी पूर्णरूप से गड्ढे के अंदर दब सी गई। 

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