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बसंत पंचमी पर गलती से भी न करें यह काम नहीं तो उठाना पड़ सकता है भारी नुकसान

बसंत पंचमी का मौसम सबसे सुहाना मौसम माना गया है। इस मौसम में जहां खेतों में फसल लहलहाती है तो वहीं सरसों के पीले पौधे सोने जैसे चमकते है। इस मौसम में फूलों की भी बहार रहती है। बसंत पंचमी का त्यौहार इस वर्ष 10 फरवरी को पड़ है।
बसंत पंचमी के दिन लोग सुबह-सुबह स्नान आदि करके भगवान शिव की पूजा अर्चना करते हैं। बसंती पंचमी को लेेकर मान्यता है कि इस दिन से ठण्ड कम होने के साथ ही गर्मी का धीरे-धीरे आगमन होने लगता है। इस दिन स्कूलों में विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है। बसंती पंचमी में मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णू और ब्रम्हा जी के आदेश से मां सरस्वती ने वीणा वादन किया था जिसे तीनों लोकों वाणी यानी शब्दों की शक्ति का ज्ञान हुआ था। इस दिन स्कूलों में निबंध लेखन, तार्किक प्रतियोगिता, गीत-संगीत जैसे कई तरह के आयोजन किए जाते हैं।
ऐसे करें मां सरस्वती को प्रसन्न
शास्त्रों में बताया गया है कि बसंत पंचमी के दिन बुद्धि की देवी मां सरस्वती की पूजा-अर्चना करनी चाहिए। इस दिन पूजा-अर्चना करने से मां सरस्वती प्रसन्न होती है और अपने भक्तों विशेष कृपा बरसाती है। भक्तों को सुबह-सुबह स्नान आदि करके पीले वस्त्र धारण करके मां सरस्वती को पीले तथा सफेद रंग के फूल अपर्ण करना चाहिए। साथ ही मां वीणा वादिनी के मंत्रो का जाप करना चाहिए जिससे मां अपने भक्तों पर प्रसन्न होती हैं।
कभी न करें यह काम
मान्यता है कि बसंत पंचमी का दिन मां सरस्वती का विशेष दिन होता हैं। इस दिन भक्तों को सात्विक भोजन के साथ ही कभी काले कलर का वस्त्र नहीं धारण करना चाहिए। काला वस्त्र पूजा-पाठ के हिसाब से वैसे भी हिन्दू धर्म में शुभ नहीं माना गया है। इस दिन किसी भी प्रकार के हरे पौधों को नुकसान नहीं पहुंचाए। साथ ही किसी भी प्रकार से लड़ाई अथवा झगड़े से दूर रहना चाहिए। बसंती पंचमी के दिन जो भक्त इन सब चीजों को बचता है उन पर मां सरस्वती विशेष कृपा होती है।

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