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जिले में बदला मौसम का मिजाज, बदलों के बीच हुई बारिश, त्योंथर खरीदी केन्द्र में भींगी धान

रीवा। जिले में एक बार फिर रविवार को मौसम का मिजाज बदल गया और सुबह से ही घने बादलों के बीच जिले में जहां बूंदाबांदी हुई है वहीं तराई अंचल में 10 से 15 मिनट के बीच तेज बारिश होने के कारण खुले स्थानों में रखी हुई धान भींग गई है। अचानक मौसम में आए बदलाव से एक बार फिर किसानों में बारिश को लेकर उम्मीद जाग उठी है। तो वहीं इस मौसम से ठण्डक ने भी दस्तक दे दी है। बूंदाबांदी के बीच चल रही हवाओं के चलते तापमान में भी गिरावट आ गई और दिन में भी लोग अलाव का सहारा लेते देखे गए। शाम होते ही लोग ठण्ड से बचने के लिए घरों में दुबकने लगे। ज्ञात हो कि लगभग 5 दिन पूर्व इस तरह का मौसम देखा गया था। हालांकि पूर्व में बारिश नहीं हुई और किसान न उम्मीद हो गए थे। एक बार फिर मौसम में आए बदलाव से बारिश की उम्मीद बढ़ी है। 
तापमान में गिरावट दर्ज 
बादल, बारिश और हवा चलने से जिले से न्यूनतम तापमान के साथ अधिकतम तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। रविवार को न्यूनतम तापमान 3.4 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया है। जबकि इसके पूर्व 5 से 6 डिग्री के बीच न्यूनतम तापमान बना हुआ था। तो वहीं अधिकतम तापमान 17.6 डिग्री रिकार्ड किया गया है। जबकि इसके पूर्व अधिकतम तापमान 20 से 21 डिग्री के बीच रहा है। तेज धूप होने के कारण दिन का तापमान भी बढ़ गया था। 
अनाज पर पड़ी मौसम की मार
जिला प्रशासन द्वारा बनाए गए जिले में धान खरीदी केन्द्र के प्रबंधन की लापरवाही के चलते मौसम की मार अनाज पर पड़ी है। जिले के तराई अंचल स्थित त्योंथर के धान खरीदी केन्द्र में खुले आसमान के नीचे रखी हुई लगभग 5 मीट्रिक टन धान भींग गई है। हालांकि बारिश थमने के बाद धान को सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन हरकत में आ गया है। कलेक्टर के निर्देश पर जिले के सभी खरीदी केन्द्रों में रखी हुई खुले में धान को सुरक्षित करने के लिए न सिर्फ धान का उठाव किया जा रहा है बल्कि टीन शेड तथा पॉलीथिन में धान को सुरक्षित किया जा रहा है। ज्ञात हो कि प्रदेश सरकार के निर्देश पर जिले में अब 2 जनवरी तक धान की खरीदी केन्द्रों में की जानी है। जबकि पूर्व में 15 जनवरी तक खरीदी के लिए समय निर्धारित किया गया था। लक्ष्य से काफी कम खरीदी होने तथा धान की आवक केन्द्रों में होने के कारण प्रशासन द्वारा खरीदी के लिए और समय बढ़ाया गया है। 
किसानों के लिए बारिश है लाभकारी
बदले मौसम के बीच बादल आने से बारिश की उम्मीद बढ़ गई है और यह बारिश लाभकारी बताई जा रही है। किसानों और कृषि वैज्ञानिकों की माने तो बारिश अगर होती है तो दलहनी एवं गेहूं की फसल के लिए सबसे ज्यादा लाभकारी होगी। जबकि तिलहन की फसल में आंशिक असर बारिश का पड़ेगा। तो वहीं सबसे ज्यादा यह बारिश जल स्तर को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है। अल्प वर्षा के चलते तथा अगस्त माह से थमी बारिश से जिले का जलस्तर लगातार नीचे जा रहा है। किसान फसलों को बचाने के लिए दिन-रात ट्यूबवेल से सिंचाई कर रहे हैं। जिससे ग्रामीण अंचलों में जलस्तर घटने से पानी की समस्या सामने आने लगी है। बारिश होती है तो सिंचाई का कार्य बंद होगा और इससे जलस्तर बढ़ेगा।

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