Sunday, June 26, 2022

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विंध्य की राजधानी रीवा में दूसरी बार खिला कमल, bjp win 312807 vote

रीवा। विंध्य की राजधानी रीवा में कांग्रेस सहित बसपा का सूपड़ा साफ हो गया है। रीवा लोकसभा में विभिन्न् दलों के प्रचार अभियान के बाद मतदाताओं ने एक तरफा भाजपा को दूसरी बार जनादेश थमा दिया हैं। कल तक चुनावी दंगल में मुकाबला आर-पार की होने की बात कहकर गिनती व गुणा लोग कर रहे थे। परिणाम ने जहां लोगों को चौका दिया वहीं इस जीत को भाजपा के पदाधिकारियों ने जनता की जीत व मोदी लहर को करार दिया हैं।  
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स्थानीय मुद्दों पर भारी पड़ा विकास

लगातार दूसरी बार रीवा संसदीय सीट पर कब्जा करने वाले जनार्दन मिश्र स्थानीय मुद्दों के साथ केन्द्र की योजनाओं की दुहाई दे रहे थे। लेकिन हम आपको बता दें कि मोदी सरकार की योजना स्थानीय लोगों के सिर चढ़कर बोल रही थी। किसी जमाने में बीएसपी का गढ़ माने जाने वाले रीवा लोकसभा सीट पर इन योजनाओं का असर इतना रहा कि बीएसपी हासिए पर खिसक गई। एसटी-एससी ओबीसी का एक बड़ा तपका खिसक कर बीजेपी के आधार वोट बैंक में शामिल हो गया। यही कारण था कि 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में जहां कांग्रेस सूपड़ा साफ करते हुए आठों विधानसभा सीटों पर न केवल दबदबा कायम किया था बल्कि रीवा लोकसभा सीट को अभेद किले के रूप में परिवर्तित कर दिया था। 8 विधायकों की उपस्थिति के बीच सम्पन्न् हुए 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की बढ़त पहले से ही मानी जा रही थी। उस पर भी मोदी की योजनाओं का तड़का, भाजपा के प्रचार में चार-चॉद लगा दिया और प्रचण्ड बहुमत के साथ जनार्दन विजयश्री हासिल करने विजय पथ पर एक कदम आगे बढ़ गए। 
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सिर चढ़कर बोल रही एयर स्टाइक

बीजेपी जहां अपने आधार वोट के साथ पुन: जनार्दन को चुनाव मैदान में उतारा था वहीं कांग्रेस 34 वर्षीय युवा को टिकट देकर युवा नेतृत्व की बात कर रही थी। लेकिन चुनाव के पहले पाकिस्तान द्वारा किए गए पुलवामा हमले के बाद मोदी सरकार द्वारा की गई एयर स्टाइक युवाओं के सिर चढ़कर बोल रही थी। जिले के कुल 17 लाख 21 हजार मतदाताओं में 11 लाख्ा 50 हजार मतदाता युवा हैं। युवाओं द्वारा चुनाव के दौरान एक बात ही कही जा रही थी कि हमें युवा नेतृत्व नहीं युवाओं की तरह काम चाहिए। एयर स्टाइक को लेकर युवा झूमते व मतवालों की तरह बात करते नजर आ रहे थे। हर युवा के सिर चढ़कर सर्जिकल स्टाइक व एयर स्टाइक बोल रही थी। पाकिस्तान के मुद्दे पर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अलावा किसी भी नेता का नाम सुनने के लिए तैयार नहीं थे। जीत का यह एक बड़ा कारण है। 
बयानबाजी में भी चूकी कांग्रेस
चुनाव समर में जब दोनों ही दल एक-दूसरे से दो-दो हाथ कर रहे थे उसी समय कांग्रेसी नेताओं की बयानबाजी ही कांग्रेस को ले डूबी। जहां कांग्रेस के नेता अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के  उपस्थिति में यह बताने के लिए आतुर दिखाई दे रहे थे कि भोपाल से रीवा नहीं बल्कि रीवा से भोपाल चलेगा। प्रदेश के मुखिया द्वारा कही गई यह बात लोगों को दिग्विजय सिंह शासनकाल याद दिलाती थी। जब अमहिया से भोपाल चलता था और लोग परेशान होते थे। इतना ही छोटे नेता चुनाव प्रचार के दौरान अक्सर यह कहते देख्ो गए कि लोगों का काम राजधानी भोपाल से होता है न कि दिल्ली है। यानी कि मतदताओं के बीच यह धौंस भी जमाने का प्रयास करते थे कि प्रदेश में हमारी सरकार है। यह भी हार का एक प्रमुख कारण रहा है। 

सुबह 6 बजे से पहले पहुंच गए कर्मचारी

मतगणना स्थल इंजीनियरिंग कालेज में सुबह 6 बजे से पहले ही मतगणना कर्मचारियों की भ्ाीड़ पहुंचने लगी थी। 700 से ज्यादा कर्मचारी मतगणना के लिए लगाए गए थे और वे निर्धारित समय से पूर्व पहुंचकर जहां अपनी उपस्थिति दर्ज कराई वहीं मतगणना कार्य में लगे रहे। खास बात यह रही कि जगह-जगह बनाए गए पुलिस के वैरीकेट्स पर मतगणना के कर्मचारियों सहित पास धारियों को निकलने के लिए मश्ाक्कत करनी पड़ी। तैनात पुलिस बल जगह-जगह पास देखने के बाद ही उन्हें अंदर प्रवेश दे रहा था। जिसके चलते पांच स्थानों पर कर्मचारी सहित निर्वाचन से जुड़े लोगों की जांच की गई। 

एलईडी पर परिणाम जानने लगी भीड़

जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा शहर के विवेकानंद पार्क और पद्मधर पार्क में परिणाम शहरवासियों तक पहुंचाने के लिए एलईडी की व्यवस्था बनाई गई थी। सुबह 8 बजे से ही परिणाम देखने के लिए लोग एलईडी के सामने एकत्रित रहे। हालांकि शुरूआती समय में परिणाम एलईडी से स्पष्ट नहीं हो रहे थे। जिसको लेकर लोगों में आक्रोश भी रहा। तो वहीं दोपहर बाद से जैसे-जैसे एलईडी में परिणाम सामने आने लगे लोगों की भीड़ भी वहां देखी गई। 

स्टेडियम तिराहे से की गई नाकेबंदी

मतगणना के चलते इंजीनियरिंग कालेज से डेढ़ किलोमीटर का एरिया पुलिस छावनी में तब्दील रहा। स्टेडियम तिराहे पर नाकेबंदी की गई थी। तो वहीं निराला नगर गेट के बीच लगभग आधा किलोमीटर से ज्यादा का क्षेत्र मतगणना के लिए लिया गया था। उक्त क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात रहा। पासधारियों को ही गेट से अंदर प्रवेश मिल पाया। जबकि आम आदमी छोटे रास्तों से अपना सफर करने के लिए मजबूर रहा। इस दौरान उम्मीदवारों के समर्थकों और पुलिस कर्मियों के बीच नोकझोक भी होती नजर आई। जैसे-जैसे रूझान साफ होने लगे समर्थकों की बढ़ती भीड़ और पुलिस के पहरा के बीच विवाद का नजारा भी देखने लायक था। 

लाउड स्पीकर से परिणाम की घोषणा

इंजीनियरिंग कालेज स्थित मतगण्ाना स्थल पर पहुंचने वाले लोगों को लाउड स्पीकर से मतगणना परिणाम की जानकारी चरणवार दी जा रही थी। प्रत्येक चरण पूरा होने पर जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा मतों की घोषणा की जा रही थी। तो वहीं उम्मीदवारों के एजेंट और उनके समर्थक घोषित मतों को न सिर्फ लिखते हुए नजर आए बल्कि मिलने वाले परिणाम को लेकर वे राजनैतिक गुणा-भाग भी लगा रहे थे और अपने प्रत्याशी के पक्ष में मिले हुए मतों पर वे समीक्षा करते नजर आए। 

मोबाइल और टेलीविजन पर लगी रहे नजरें

मतगणना का रूझान जानने के लिए न सिर्फ श्ाहर के लोग बल्कि दूर-दराज ग्रामीण अंचल में रह रहे लोग भी उत्सुक रहे। शहर के लोग मोबाइल, नेट, टेलीविजन और लगाई गई एलईडी के साथ ही समर्थकों द्वारा मतगणना स्थल पर पहुंचकर मतों की जानकारी लेते रहे। तो वहीं उनके परिचित दूर-दराज से फोन में संपर्क करके घोषित हो रहे परिणाम को जानने के लिए उत्सुक रहे। हर एक-एक घंटे में वे अपने परिचितों से परिणाम की जानकारी लेते रहे। 

स्ट्रांग रूम खुलने के बाद नदारत हुए प्रत्याशीद्वय

निर्धारित समय पर मतगणना का कार्य सुबह 8 बजे से शुरू किया गया। मतगणना के चलते जिला निर्वाचन अधिकारी की देखरेख में तथा राजनैतिक पार्टियों के एवं चुनाव मैदान में उतरे अभ्यर्थियों की मौजूदगी में स्ट्रांग रूम खोला गया। दिलचस्प पहलू यह रहा कि स्ट्रांग रूम खुलते ही जहां पूरा अमला मतगणना कार्य में जुट गया वहीं उम्मीदवारद्वय मतगणना स्थल से नदारत नजर आए। हालांकि उनके एजेंट हर समय मौजूद रहकर मतगणना की जानकारी लेने के साथ ही मतों को लिखकर गुणा-भाग करते रहे। 

सुरक्षा कर्मियों का भोजन पर रहा ध्यान

इंजीनियरिंग कालेज परिक्षेत्र में मतगणना के दौरान साढ़े 500 से ज्यादा पुलिस बल तैनात किया गया था। सुरक्षा-व्यवस्था के लिए तैनात बल पानी और भोजन पर अपना ध्यान ज्यादा केन्द्रित रखते हुए नजर आया। तपती गर्मी के बीच जहां वह कई बार सुरक्षा-व्यवस्था को छोड़कर भोजन-पानी के लिए हाथ-पांव मारता रहा वहीं अधिकारियों के आने की भनक लगते ही वह अपनी ड्यूटी स्थल पर मुस्तैद रहा। 

रास्ता बंद होने से परेशान हुए यात्री

विश्वविद्यालय बैकुण्ठपुर सिरमौर मार्ग में नाकेबंदी की गई थी और मॉडल स्कूल के सामने से वाहनों का प्रवेश बंद किया गया था। जिसके चलते बैकुण्ठपुर, सिरमौर सहित विश्वविद्यालय अनंतपुर जाने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई यात्री तो वाहन छोड़कर अपना झोला, बैग और बोरी सिर में रखकर बनाए गए वैरीकेट्स को पार करने का प्रयास करते रहे। 

कार्यालयों में पसरा रहा सन्न्ाटा

मतगणना के चलते वर्किंग डे होने के बाद भी लगभग सभी कार्यालयों में सन्न्ाटा पसरा रहा। कलेक्टर कार्यालय, नगर निगम सहित अन्य प्रमुख कार्यालयों में तो अवकाश जैसा माहौल बना हुआ था। कार्यालयीन कर्मचारी जो भी कार्यालय में पहुंचे वे रीवा लोकसभा सहित प्रदेश और दिल्ली की मतगणना पर अपनी नजर बनाए हुए थे। तो वहीं परिणाम जानने के साथ ही उसकी समीक्षा करते भी नजर आए। ढेकहा स्थित अटल कुंज भाजपा कार्यालय में भी पार्टी के पदाधिकारी परिणाम जानने के लिए एकत्रित रहे और टेलीवीजन में प्रसारित हो रहे परिणाम को देखकर जयकारे भी लगाते रहे। तो वहीं कांग्रेसी नेता लगातार वोट प्रतिशत जानने के लिए एक-दूसरे से फोन करके जानकारी एकत्र करते रहे। गली-कूचों से लेकर घरों में बैठे लोग टेलीवीजन में पर प्रसारित हो रहे चुनाव परिणाम पर अपनी नजर जमाए रहे। 
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