Saturday, June 25, 2022

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बेल्ट में फंसकर इंजीनियर की हो गई मौत, आक्रोशित भीड़ ने फैक्ट्री को घेरा

 रीवा। बेला स्थित सीमेंट प्लांट में हुए हादसे के बाद पूरे परिसर में सनसनी फैल गई। मजदूरों और स्थानीय नागरिकों ने फैक्ट्री को घेर लिया। शुरूआती दौर में प्रशासन भी गृह मंत्री के रीवा में रहने के कारण देर से पहुंचा। लिहाजा आक्रोश और बढ़ता जा रहा था। उधर फैक्ट्री प्रबंधन ने घटना के तत्काल बाद हादसे में मारे गए इंजीनियर का शव घटना स्थल से निकालने का प्रयास किया, लेकिन फैक्ट्री के मजदूर संगठन के सामने आ जाने से प्रबंधन ऐसा कर पाने में असफल रहा। 
बेल्ट में फंसकर इंजीनियर की हो गई मौत, आक्रोशित भीड़ ने फैक्ट्री को घेरा
बताया गया है कि  सीमेंट प्लांट में इंजीनियर की मौत पर गुरुवार को बवाल मच गया। गुस्साए लोगों ने फैक्ट्री के बाहर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। मौके पर पहुंची पुलिस ने आक्रोशित लोगों को समझाइश देकर शांत करवाने का प्रयास कर रही है। नौबस्ता चौकी अंतर्गत अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट में यह हादसा हुआ है। इंजीनियर शैलेंद्र द्विवेदी निवासी सगोनी थाना चोरहटा गुरुवार की दोपहर प्लांट के अंदर काम कर रहा था। उसी दौरान इंजीनियर अचानक मशीन के बेल्ट में फस गया। इस हृदय विदारक हादसे में इंजीनियर की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। घटना से प्लांट के अंदर अफरा-तफरी का माहौल निर्मित हो गया। हादसे की जानकारी जैसे ही परिजनों सहित स्थानीय लोगों को हुई तो बवाल मच गया। 
बेल्ट में फंसकर इंजीनियर की हो गई मौत, आक्रोशित भीड़ ने फैक्ट्री को घेरा
सैकड़ों की संख्या में गुस्साए लोग फैक्ट्री पहुंच गए और प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। पुलिस ने स्थानीय लोगों को समझाइश देकर शांत करवाने का प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी दोषी फैक्ट्री प्रबंधन पर कार्रवाई व पीडि़त परिवार को मुआवजा की मांग कर रहे थे। घटना से तनाव की स्थिति निर्मित हो गई जिसको देखते भारी पुलिस बल तैनात हो गया है। फिलहाल इंजीनियर का शव फैक्ट्री के अंदर से उठाया नहीं गया है।

प्रबंधन और श्रमिक संगठन की हुई तनातनी

हुआ यह था कि अल्ट्राटेक सीमेंट प्रबंधन के वाइस प्रेसीडेंट कमलेश अग्रवाल, पर्सनल मैनेजर जेपी सिंह, नरेन्द्र पाल और नंदलाल चौबे को जब इस हादसे की जानकारी हुई तो इन लोगों ने सबसे पहले मृतक इंजीनियर शैलेन्द्र द्विवेदी का शव वहां से निकालने का प्रयास किया। इन अधिकारियों ने शुरू में न तो परिवार को जानकारी दी और न ही फैक्ट्री में काम करने वाले लोगों को। जैसे ही इस बात की जानकारी श्रमिक संगठन के लोगों को हुई वे तत्काल वहां पहुंच गए और इसका विरोध किया। 
बेल्ट में फंसकर इंजीनियर की हो गई मौत, आक्रोशित भीड़ ने फैक्ट्री को घेरा
लिहाजा मृत इंजीनियर का शव परिवार के आने के बाद ही वहां से निकाला गया। श्रमिक संगठन के पदाधिकारी अनिल त्रिपाठी, राकेश शुक्ला, दिलीप सिंह, योगराज, आनंद शुक्ला, राजकुमार, सीटू अध्यक्ष बसंतलाल सिंह, सुरेन्द्र सिंह, अजीत सिंह, आदि ने इस घटनाक्रम का विरोध किया। साथ ही कहा कि जब तक परिवार के लोग नहीं आ जाएंगे तब तक फैक्ट्री से बाहर शव नहीं जाने दिया जाएगा।

सुरक्षा से संबंधित होती है केवल भाषणबाजी

अल्ट्रा टेक प्रबंधन पर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि यहां पर सुरक्षा के नाम पर महज भाषणबाजी होती है। लेकिन सुरक्षा के कोई बंदोबस्त नहीं है। उक्त इंजीनियर शैलेन्द्र द्विवेदी 50 फिट ऊपर काम कर रहे थे और वहां पर सुरक्षा-व्यवस्था न के बराबर थी। लोगों का आरोप है कि सुरक्षा के मापदण्डों का कतई पालन नहीं किया जाता तथा फैक्ट्री में इंजीनियर को अकेले चढ़ा दिया गया था। हादसे के बारे में बताया गया है कि वह मशीन सुधार रहा था तभी अचानक मशीन का संचालन हो गया और उसके बेल्ट में इंजीनियर शैलेन्द्र द्विवेदी फंस गए। घटना स्थल पर ही उनकी मौत हो गई। शरीर के मुख्य अंगों में उन्हें गंभीर चोटें आई थी और उन्होंने दम तोड़ दिया।

अनाथ हो गई दो पुत्रियां

बताया गया है कि 32 वर्षीय इंजी. शैलेन्द्र द्विवेदी पिता केशरी प्रसाद द्विवेदी निवासी सगौनी थाना रामपुर बघेलान बहुत ही होनहार युवक था। उनकी दो पुत्रियां क्रमश: अपेक्षा द्विवेदी 5 वर्ष व अर्पिता 3 वर्ष की हैं। जिन्हें यह नहीं मालुम की उनके सिर से पिता का साया उठ चुका है। पत्नी वंदना द्विवेदी का रो-रोकर बुरा हाल था। उधर जनपद सदस्य लालमणि पाण्डेय, जिला पंचायत वार्ड 9 के सदस्य अशोक सिंह ने अल्ट्रा टेक प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा है कि पीडि़त परिवार को तत्काल सहायता राशि उपलब्ध कराई जाए। साथ ही पत्नी को नौकरी एवं पुत्रियों की शिक्षा-दीक्षा का खर्च प्रबंधन उठाए। इस मामले में प्रशासन की भूमिका भी काफी संदिग्ध रही। देर शाम तक प्रबंधन का कोई अधिकारी घटनाक्रम की जानकारी लेने प्रशासन के समक्ष नहीं आया। वहीं प्रशासन लगातार प्रबंधन का इंतजार करता रहा। हालांकि हमारे सूत्र बता रहे हैं कि प्रबंधन इसलिए नहीं सामने आ रहा कि आक्रोशित लोगों का सामना उन्हें न करना पड़े  तथा किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति न बनें। सूत्रों ने यह भी बताया है कि प्रबंधन पीडि़त परिवार व संगठन की जायज मांग मानने के लिए प्रशासन को आश्वस्त कर दिया है।
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