Sunday, June 26, 2022

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बहती गंगा में नहा लिए रीवा के भाजपा विधायक, श्रेय लेने अब आ रहे नेता आगे

रीवा। चार दिन पहले लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद भाजपा विधायकों की बांछे खिली हुई है। परिणाम के एक दिन पहले तक उन्हें खुद भी आशा नहीं थी कि इतनी लीड मिल जायेगी अथवा इतने वोट भाजपा प्रत्याशी को मिल जायेंगे। 
परिणाम आते ही श्रेय लेने के लिये सभी विधायक अपने संगठन पदाधिकारियों को अपनी रिपोर्टे देते हुये अब यह कहते सुने जा रहे हैं कि यह सब हम लोगों की मेहनत थी। 
उल्लेखनीय है कि टिकट वितरण के दौरान रीवा का आरएसएस ग्रुप और कम से कम पांच विधायक वर्तमान सांसद को टिकट दिये जाने के पक्ष में ही नहीं थे। टिकट मिलने के बाद भी इन विधायकों का रुख पूर्णरुपेण सकारात्मक नहीं था। लेकिन संगठन के दबावों के आगे झुके और चुनाव प्रचार में हिस्सा लेना शुरू किया। सूत्रों ने बताया है कि इन विधायकों को अंतिम दौर तक भी यह आशा नहीं थी कि इस बार रीवा से भाजपा इतने अधिक मतो से निकलेगी। सौभाग्य यह था कि गांव के अंदरुनी हिस्से में मोदी मैजिक चल गया और हर विधानसभा में यह स्थिति बनी कि जहां देखों वहीं से कमल ही आगे रहा। कांग्रेस का मैनेजमेंट औंधे मुंह गिर गया और भाजपा अपने कार्यकर्ताओं के दम पर रिकार्ड तोड़ वोटों से जीत गई। लेकिन उसका श्रेय लेने में अब भाजपाई विधायक जुटे हुये हैं। 
पिछले विधानसभा चुनावों में भाजपा को जहां महज 42569 मत मिले थे वहीं दूसरी ओर लोकसभा चुनावों में लगभग दो गुने मतलब 81909 मत मिले और 46682 की लीड मिली। यहां यह उल्लेखनीय है कि विधानसभा चुनावों में भाजपा प्रत्याशी रहे नागेन्द्र सिंह को केवल 42569 मत मिले थे। मतलब जितने मत विधानसभा चुनाव में मिले थे उससे ज्यादा की जीत अकेले गुढ़ विधानसभा क्षेत्र में हुई। इसी प्रकार मऊगंज में भी इसी तरह की स्थितियां थी। पिछले विधानसभा चुनाव में मऊगंज से प्रत्याशी रहे प्रदीप पटेल को 52729 मत मिले थे। जबकि लोकसभा में 52055 की लीड अकेले मऊगंज से ही भाजपा प्रत्याशी व सांसद जनार्दन मिश्र को मिल गई। यहां यह भी गौरतलब है कि रीवा जिले की आठो विधानसभा सीटों में सबसे ज्यादा लीड मऊगंज क्षेत्र से ही मिली थी। 
इसी प्रकार हर विधानसभा क्षेत्र में कम से कम 31 हजार से ज्यादा की ही लीड भाजपा प्रत्याशी को मिलती रही। इसके पीछे मूल कारण रीवा का भाजपा संगठन तथा प्रदेश संगठन रहा। जो लगातार कार्यकर्ताओं को एक जुट करते हुये सक्रिय बनाये रखा। लेकिन दूसरी ओर इस समय भाजपा विधायक यह श्रेय लेने में जुट गये हैं कि यह सब उनकी मेहनत का कमाल है। कई विधायकों ने प्रदेश संगठन और केन्द्रीय संगठन के पदाधिकारियों एवं आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारियंों को अपने क्षेत्र की जानकारी देने के साथ इसका श्रेय खुद लेने में जुट गये हैं। कहा जाता है कि संगठन भी समझता है कि यह मोदी मैजिक का खेल था। अगर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दिल्ली से अपना जादू न चलाये होते तो यह स्थिति न बन पाती और हर प्रत्याशी इतने अधिक मतो से न जीत पाता। यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि रीवा के कार्यकर्ताओं की वजह से लगातार यह स्थितियां बनी हैं और कांग्रेस अब अपनी जमीन तलाश रही है। 
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