Sunday, June 26, 2022

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अहम सवाल… रीवा की जनता थी भाजपा के साथ अथवा मोदी के साथ, क्या रीवा के विकास को गति दे पायेंगे जनार्दन?

 रीवा । बीते लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को भारी बहुमतो से रीवा की जनता ने जिताया और जनार्दन मिश्र को एक बार फिर संसद में बैठा दिया है। लेकिन इन चुनाव परिणामों के बाद एक सवाल अभी भी लोगों के जेहन में बरकरार है कि इस बार के चुनाव में क्या भाजपा प्रत्याशी की इतनी अधिक लोकप्रियता थी कि वे तीन लाख से ज्यादा मतों से चुनाव जीते या फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का अण्डर करंट इस कदर था कि अन्य दल उस करंट के आगे बौने पड़ गये। अलबत्ता अब सांसद तो जनार्दन मिश्र चुने ही जा चुके हैं और विकास का पहिया सरपट दौड़ाने की जिम्मेदारी उन पर आ चुकी है। 
 अहम सवाल... रीवा की जनता थी भाजपा के साथ अथवा मोदी के साथ, क्या रीवा के विकास को गति दे पायेंगे जनार्दन?
लोकसभा चुनाव परिणाम आने के पन्द्रह दिनों के बाद भी लोग जीत के आंकड़े को पचा नहीं पा रहे हैं। लोगों का मानना है कि इतने अधिक वोट भाजपा को कैसे मिल गये। विधानसभा चुनावों की अगर तुलना की जाये तो यह आंकड़ा सवा लाख के आसपास ही बैठता है। लेकिन बीते विधानसभा चुनाव के तीन महीनों के भीतर ही ऐसा क्या हो गया कि भाजपा ने अचानक दो लाख की लीड ले ली। इसके पीछे का जब सच जानने का प्रयास किया गया तो दो कारण सामने आये। जिसकी वजह से भारतीय जनता पार्टी ने इस स्थिति को प्राप्त किया। अभी तक की जानकारियों के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी के शीर्षस्थ केन्द्रीय पदाधिकारियों ने पिछले विधानसभा चुनाव परिणाम विपरीत आने के बाद ही कमर कस लिया था। जनवरी महीने के पहले दिन से ही संगठन ने इतनी सक्रियता बढ़ा दी और निचले स्तर तक के कार्यकर्ता को इतना मोटीवेट किया कि वे सब चुनाव तारीख की घोषणा के पूर्व ही अपनी सारी तैयारियां कर चुके थे। राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने हर प्रदेश के संगठन प्रमुखों समेत जिला प्रमुखों की बैठक में यह नसीहत दी थी कि हमे बूथ जीतना है। उसका परिणाम यह हुआ था कि चुनावों के 45 दिन पहले ही वन बूथ-टेन यूथ का फार्मूला लगाते हुये भाजपा ने एक बड़ी फौज इकठ्ठी कर ली थी। खास बात यह थी कि कार्यकर्ताओं के दिलो-दिमाग में यह बात भरी गई थी कि प्रत्याशी तो केवल मुखौटा रहेगा, मुख्य चेहरा नरेन्द्र मोदी ही रहेंगे। इसलिये नारा भी भाजपा ने उसी अंदाज में बनाया था कहो दिल से, मोदी फिर से। इसका फायदा भाजपा को जर्बदस्त तरीके से मिला। दूसरा एक अहम कारण भारतीय जनता पार्टी के लिये फायदे वाली केन्द्र सरकार की योजनाएं रहीं। इसमें प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्वला योजना तथा गांवों के लिये मिलने वाली योजना रही। साथ ही सितम्बर महीने में एसएसटी एक्ट अध्यादेश पारित करना भी भाजपा के लिये फायदेमंद साबित हुआ। इन तीन-चार योजनाओं के चलते  जातीय समीकरण तहस-नहस होते हुये वे सब एक ओर ही चले गये। राष्ट्रवाद के मुद्दे का कुछ फीसदी ही असर देखने को मिला। इन सब कारणों के चलते भाजपा ने ऐतिहासिक जीत हासिल की है। 

लोग कहते थे… 

रीवा की अधिकांश जनता पहले सिर्फ यह कहती थी कि भारतीय जनता पार्टी का मौजूदा सांसद कौन है, नहीं जानते और इस बार भाजपा को ही सबक सिखाना है। सर्वे रिपोर्टे में जब यह बाते सामने आईं तो कांग्रेसी खासे प्रसन्न हुये थे। भाजपा ने इस बात को स्थानीय स्तर पर भांप लिया था। लिहाजा जब चुनाव प्रचार अभियान चालू हुआ तो प्रचार में जनार्दन का उल्लेख न के बराबर और नरेन्द्र मोदी को सामने ला दिया गया। चुनाव मतदान के एक सप्ताह पूर्व तक यही स्थिति बनी हुई थी कि लेकिन अंतिम दौर में भाजपा के मैदानी कार्यकर्ताओं ने जो ताकत झोंकी और दूसरी ओर डायवर्ट हो रहे वोटों को अपनी ओर खीच लिया वह वाकई में तारीफे-ए-काबिल था। लोग अभी भी कहते हंैं उन्हें स्थानीय सांसद से ज्यादा आशाएं नहीं है क्योंकि उन्होंने पांच साल का कार्यकाल देख लिया है। उन्हें आशा है तो केवल मोदी… मोदी… मोदी से। 

वचन पत्र रहा बेअसर

विधानसभा चुनावों में कांग्रेस द्वारा दिये गये वचन पत्र को लोगों ने सर आंखों पर लिया था (विंध्य को छोड़कर)। लिहाजा विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पचास फीसदी विधानसभा क्षेत्रों में अपना कब्जा जमाने में सफल रही। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष व मुख्यमंत्री कमलनाथ के दावे के मुताबिक वचन पत्र में से 75 वचन पूरे किये जा चुके हैं। लेकिन मप्र और खास तौर पर विंध्य की जनता ने उस वचन पत्र को शायद कूड़े के भाव लिया और कांग्रेस को जरा भी तरजीह नहीं दी। परिणाम आने के पन्द्रह दिन बीत चुके हैं, अब कांग्रेस भी शायद उस वचन पत्र को देखना भूल सी चुकी है। कांग्रेस को भी शायद इस तरह के परिणामों की आशा नहीं रही होगी। कांग्रेसी भी इस सवाल का उत्तर ढूंढ रहें है कि विंध्य और मप्र में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी जीते हैं अथवा मोदी का अण्डर करंट। क्योंकि अब उन्हें अगली रणनीति बनानी है। 

लोगों को इंतजार विकास की गति का 

अब जब एक बार फिर भाजपा की सरकार बन चुकी है, जनार्दन मिश्र दोबारा सांसद बन कर संसद पहुंच चुके हैं लिहाजा लोगों की आशाएं एक बार फिर बढ़ चुकी है। मांग पुरानी है लेकिन जायज है- रीवा से मुम्बई नई ट्रेन, रीवा से मिर्जापुर नई रेल लाइन, किसानों को लाभ का धंधा, जिले में पर्यटन केन्द्रों को बढ़ावा, स्थानीय उद्योगों में स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार दिलवाना, बाणसागर का पानी सिरमौर, सेमरिया, त्योंथर, मऊगंज अंचल तक पहुंचाना। इन मुद्दों पर जब चुनाव मतदान के ठीक तीन दिन पहले विंध्य भारत ने बात की थी तो जनार्दन मिश्र ने स्पष्ट रूप से कहा था कि इस दूसरे कार्यकाल में इन्हीं मुद्दों पर काम होगा। लोगों को इंतजार है एक बार फिर कि विकास की पहिया सरपट दौड़ेगा या फिर उसकी गति कछुए की चाल के बराबर रहेगी।
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